नैनीताल: हाईकोर्ट ने दूरस्थ गांवों के बुजुर्गों को सहूलितय देने वाली याचिका पर मांगा डाटा

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Published By Bhupesh Kanaujia
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विधि संवाददाता, नैनीताल, अमृत विचार। हाईकोर्ट ने प्रदेश के दुर्गम और अतिदुर्गम क्षेत्रों में वीरान हो रहे गांवों में अकेले रह रहे बुजुर्गों को मूलभूत सुविधाएं देने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से छह सप्ताह के भीतर शपथ पत्र पेश करने को कहा है।

जिसमें इन सुविधाओं के लिए आवेदन करने वाले बुजुर्गों का आंकड़ा बताना होगा। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उनके पास मदद के लिए आवेदन नहीं आए, हालांकि सरकार इस पर काम कर रही है। अब मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।

बागेश्वर निवासी अधिवक्ता दीपा आर्या ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि प्रदेश के दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में जिन परिवारों के लोग नौकरी व अन्य कारणों से पलायन कर चुके हैं, उन परिवारों के बुजुर्ग अकेले ही गांवों में मुश्किलों भरा जीवन यापन कर रहे हैं। देखभाल से विरत इन बुजुर्गों का जीवन बारिश व सर्दियों में बदतर हो जाता है। इन रिमोट इलाकों में एनजीओ भी नहीं पहुंच पाते हैं, जिससे इन्हें समाज की तरफ से किसी भी तरह की कोई मदद नहीं मिल पाती है।

याची ने इन वरिष्ठ नागरिकों को केंद्रीय सोशल वेलफेयर एक्ट-2007 के तहत सहायता दिलाने की प्रार्थना की है। प्रार्थना में यह भी कहा कि सरकार की आंगनबाड़ी व आशा बहनों के माध्यम से ऐसे लोगों का डाटा तैयार किया जाए और सरकार इन्हें नियमों के तहत तत्काल मदद पहुंचाए। वर्तमान में इन वरिष्ठ नागरिकों को इसकी जानकारी नहीं है, इसलिए सरकार उन्हें समय-समय पर जागरूक भी करें। याचिका में कुमाऊं व गढ़वाल के आयुक्तों समेत सभी जिलाधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।

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