Uttrakhand:संपत्ति की खरीद-बिक्री में बैंक से लेन देन का रिकॉर्ड ही सबसे बड़ा सबूत

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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हल्द्वानी, अमृत विचार। भूमि या किसी भी संपत्ति की खरीद-बिक्री में नकद लेनदेन से बचना चाहिए और भुगतान बैंक के माध्यम से करना आवश्यक है। बैंक से किए गए लेन देन का रिकॉर्ड ही सबसे बड़ा सबूत बनता है। यह अपील कमीश्नर दीपक रावत ने जनता से की है। दीपक रावत मंगलवार को मिनी स्टेडियम रोड स्थित कैंप कार्यालय में जन समस्याएं सुन रहे थे। उन्होंने भूमि संबंधित प्रकरणों की सुनवाई करते हुए सुझाव दिया कि किसी भी अनरजिस्टर्ड या निजी साहूकार से लोन लेना जोखिमपूर्ण हो सकता है। ऐसे मामलों में अत्यधिक ब्याज, अवैध दबाव तथा आर्थिक नुकसान का खतरा रहता है।

दरअसल, जनसुनवाई में यह प्रकरण आया कि कालाढूंगी निवासी सफाई कर्मचारी अमित ब्याज पर धनराशि देता है। जो भी ऋण लेने वाला उसकी रकम ब्याज समेत नहीं लौटा पाता था उसकी भूमि अपने नाम दर्ज करा लेता था। कविता बाल्मीकि ने ने बताया कि अमित से 1.50 लाख रुपये का लोन लिया था जिसे ब्याज सहित 2.50 लाख रुपये लौटा दिए थे। फिर भी अमित ने कविता की जमीन पहले अपने नाम की फिर अन्य को बेच दी। कविता ने जो धनराशि दी नकद दी थी जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं है।

पूरा मामला समझते हुए आयुक्त ने 2 लाख की धनराशि देने के निर्देश दिए। वहीं, अमित ने कहा कि एक माह के भीतर धनराशि वापस कर देगा साथ ही भविष्य में सूद-ब्याज का काम भी नहीं करेगा। गीता नेगी ने बताया कि उन्होंने भूमि क्रय की थी, भूमि की संपूर्ण धनराशि डीलर विनोद गड़िया को देने के बावजूद डीलर भूमि की रजिस्ट्री नहीं करा रहा है। आयुक्त ने तीनों पक्षों भू-स्वामी, डीलर तथा क्रेता का पक्ष सुनने के बाद डीलर व भूस्वामी को 5 मई तक रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए। कड़े लहजे में कहा कि आदेश की अवहेलना पर संबंधित के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।


बिना मांगे ही बैंक ने दे दिया 80 हजार रु.का लोन
मो. जाहिद निवासी बनभूलपुरा ने बताया कि बैंक ने उनके नाम पर 80 हजार का लोन दे दिया, जबकि उन्होंने कभी आवेदन नहीं किया था। इस पर आयुक्त ने बैंक अधिकारियों को तलब कर शीघ्र समस्या का समाधान के निर्देश दिए। खष्टी देवी ने बताया कि उनके पिताजी 1989 में स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त हो गए थे। पिताजी की मृत्यु 2018 में होने के बाद उन्हें पेंशन नही मिल रही है। इस पर आयुक्त ने सीएमओ एवं कोषाधिकारी को तलब कर शीघ्र पेंशन भुगतान के निर्देश दिए। राजप्रीत कौर ने पारिवारिक भूमि बंटवारे में गड़बड़ी की शिकायत की। इस पर आयुक्त ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पटवारी को जांच के निर्देश दिए।

पांच करोड़ से अधिक की 22 सरकारी विभागों की 390 योजनाएं हैं लंबित
कुमाऊं मंडल के छह जिलों में 22 सरकारी विभागों की पांच करोड़ से अधिक की 390 विकास योजनाएं लंबित हैं। इनमें 19220.48 करोड़ से इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, लोनिवि के पास पांच करोड़ से अधिक की 62, राष्ट्रीय राजमार्ग के पास 25, जल निगम के पास 44, सिंचाई 30, पेयजल निगम 51, ब्रिडकुल 22, मंडी समिति 50, ग्रामीण निर्माण विभाग 8, कुमाऊं मंडल विकस निगम 1, पीआईयू हल्द्वानी 6, पीआईयू नैनीताल 1, पीआईयू चम्पावत 3, पीएमजीएसवाई 52, पिटकुल 4, यूपीसीएल 10, जल संस्थान 2, जलागम 1, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 4, डेयरी फेडरेशन 1, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम 11, जमरानी 1, एम्स सैटेलाइट की एक योजना है। इन पर कुल 19220.48 करोड़ रुपये की योजनाएं हैं जिससे कुमाऊं की बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। आयुक्त रावत ने कहा कि सभी योजनाएं जनहित के लिहाज से अति महत्वपूर्ण है। इन योजनाओं को समय से पूरा किया जाए तभी इनका लाभ जनता तक पहुंच सकेगा और शासन-प्रशासन का लक्ष्य पूरा होगा।

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