Uttrakhand:चिंगारी बनी आग, सिडकुल कंपनी में जमकर हुआ बवाल, पुलिस ने फटकारी लाठियां

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Published By Monis Khan
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रुद्रपुर, अमृत विचार। नोएडा की तर्ज पर औद्योगिक आस्थान सिडकुल में वेतन वृद्धि की चिंगारी उस वक्त भड़क कर आग बन गई, जब पुलिस ने सैकड़ों की तादाद में श्रमिकों को लाठियां फटकार खदेड़ने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और श्रमिकों में जमकर धक्का-मुक्की हुई। श्रमिकों का कहना था कि कंपनी प्रबंधन श्रमिकों की आवाज दबाने के लिए पुलिस प्रशासन का सहारा ले रही है। सूचना मिलते ही तहसीलदार और सीओ पंतनगर भी मौके पर पहुंचे और गुस्साए श्रमिकों को समझाने का भरसक प्रयास किया और पुन: श्रमिकों ने धरना प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया।

यहां बता दें कि शुक्रवार की सुबह अचानक सिडकुल की वी गार्ड कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड कंपनी के सैकड़ों की तादाद में श्रमिक गेट के बाहर आए और कार्य बहिष्कार कर वेतन वृद्धि किए जाने का मुद्दा उठाने लगे। उनका कहना था कि भारत सरकार ने न्यूनतम वेतन वृद्धि 21 हजार रुपये किए जाने का शासनादेश जारी किया है। प्रदेश सरकार इसे धरातल पर उतार नहीं पायी है। काफी समझाने के बाद भी श्रमिक नहीं माने। पूरे रात श्रमिक धरनास्थल पर डटे रहे। शनिवार की सुबह हुई तो अचानक गुस्साए श्रमिकों का आक्रोश भड़क गए।

जिसकी सूचना मिलते ही तहसीलदार दिनेश कुटोला, सीओ पंतनगर डीआर आर्या और थाना पंतनगर नंदन सिंह रावत भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। श्रमिकों को कंपनी से दो सौ मीटर दूर जाने का आदेश दिया, लेकिन श्रमिक नहीं माने तो पुलिस ने लाठियां फटकार खदेड़ने की कोशिश की। मगर श्रमिक और पुलिस के बीच जमकर धक्का मुक्की होने लगी। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। श्रमिकों का कहना था कि कंपनी प्रबंधन श्रमिक उत्पीड़न के बाद अब पुलिस से मिलकर दमनकारी नीति अपना रही है।

अब न्यूनतम वेतनमान 21 हजार रुपये का मुददा उग्र आंदोलन में तब्दील होगा। पुलिस और कंपनी की तानाशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हंगामे की भनक लगते ही एएलसी अरविंद सैनी ने श्रमिकों को समझाने की कोशिश की, लेकिन श्रमिक नहीं माने और आंदोलन जारी रहा। एहतियात के तौर पर मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया।

दौड़ती पुलिस के बाद बेहोश होते रहे श्रमिक
बी गार्ड श्रमिकों को खदेड़ने की कार्रवाई के दौरान धरना स्थल पर अफरा तफरी का माहौल ऐसा पैदा हुआ कि पुलिस ने लाठियां फटकारते हुए धक्का मुक्की कर श्रमिकों को खदेड़ना शुरू हुआ। इसके बाद श्रमिकों में भी भगदड़ सी मचने लगी। भागते वक्त चिलचिलाती धूप के कारण कई महिला श्रमिक गश खाकर नीचे गिरने लगी तो कोई ठोकर खाकर चोटिल होने लगा। जिसे देखकर श्रमिकों का गुस्सा बढ़ गया और श्रमिकों ने भी पुलिस प्रशासन को खरी खोटी सुनाना शुरू कर दी। देखते ही देखते एक घंटे तक अफरा तफरी का माहौल रहा और सहकर्मी साथियों को उठाकर होश में लाने की कोशिश करने लगे। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने भी फौरन एंबुलेंस को रवाना किया और स्वास्थ्य कर्मियों ने दवा देकर स्थिति को नियंत्रित किया।

जब रो-रोकर पीड़ा बताने लगे श्रमिक
रुद्रपुर। धरनास्थल पर पहुंचे तहसीलदार और सीओ द्वारा खदेड़ने की कार्रवाई शुरू हुई। महिला श्रमिकों ने पुलिस पर अपनी भड़ास निकाली तो कई श्रमिकों ने रो-रोकर अपनी व्यथा सुनाई। उनका कहना था कि हर श्रमिक का 21 हजार न्यूनतम वेतनमान होना चाहिए। कारण कंपनी ने खानपान, आवाजाही, स्वास्थ्य, ईएसआई, पीएफ के अलावा ऐसी कोई भी बेहतर सुविधा नहीं देता है। जिसके जरिए श्रमिक अपनी जीविका को बेहतर बना सके। अप्रशिक्षित श्रमिक रोज चोटिल होते हैं। अति दुर्गम पर्वतीय इलाकों में परिवार आर्थिक स्थिति का सामना कर रहा है। ऐसे में घर छोड़कर बेटियां मजदूरी कर रही है।

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