उर्स-ए-ताजुश्शरिया:आधी रोटी खा लेना मगर बच्चों की तालीम कराना, बेटियों को फोन से रखें दूर
बरेली, अमृत विचार। सौदागरान की गलियों और सीबीगंज की सड़कों पर शनिवार को ताजुश्शरिया के चाहने वालों का हुजूम नजर आया। सुन्नी बरेलवी मुसलमानो के मजहबी रहनुमा ताजुश्शरिया मुफ्ती मोहम्मद अख्तर रजा खां अजहरी मियां के दो दिन तक चलने वाला उर्स कुल की रस्म के बाद अपने अंजाम पर पहुंचा। काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद मियां ने खास दुआ की। वहीं उर्स के मंच से उलमा ने पैगाम दिया कि भले आधी रोटी खांए मगर अपने बच्चों को तालीम जरूर दें। खास तौर से बेटियों को की तालीम पर जोर देने के साथ उनको मोबाइल फोन से दूर रखने की अपील की गई।
ताजुश्शरिया के आठवें उर्स की सरपरस्ती सज्जादानशीन काजी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती मोहम्मद असजद रजा खां कादरी (असजद मियां) ने की। उर्स प्रभारी सलमान मियां और जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां दो दिन तक चलने वाले उर्स के तमाम कार्यक्रमों की निगरानी में लगे रहे। फरमान मिया ने बताया कि शनिवार को दरगाह ताजुश्शरिया पर फजर की नमाज के बाद कुरानख्वानी व नात-ओ-मनकबत की महफिल से कार्यक्रम का आगाज हुआ। सुबह 07 बजकर 10 मिनट पर मुफस्सिर-ए-आजम हिंद जिलानी मियां के कुल की रस्म अदा की गई। मुख्य कार्यक्रम सीबीगंज स्थित मदरसा जामियातुर रजा में हुआ। जोहर की नमाज के बाद कारी रिजवान ने कुरान की तिलावत से उर्स के कार्यक्रम का आगाज किया। मौलाना गुलजार रजवी ने निज़ामत की। कोलकाता से आए नामचीन नातख्वां असद इकबाल और मुंबई के रफीक रजा कादरी नात-ओ-मनकबत का नजराना पेश किया।
जमात के पूर्व प्रवक्ता समरान खान ने बताया कि मुफ्ती शाहजाद आलम मिस्बाही ने अपनी तकरीर में कहा ताजुश्शरिया ने अपनी पूरी जिंदगी मजहब व मसलक के लिए वक्फ कर दी। मसलक के फरोग के लिए दुनियाभर के दौरे किए और इल्म की शमा रौशन की। लिहाजा आज मुसलमानों को ताजुश्शरिया के नक्शे कदम पर चलते हुए अपने बच्चों को दीनी व दुनियावी तालीम देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चाहे आधा पेट खाये लेकिन अपने बच्चों की शिक्षा पर खास ध्यान दें। खास तौर से बेटियों को तालीम जरूर दें और उनको मोबाईल फोन से दूर रखें। काल्पी के सज्जादाशीन सैय्यद गियास मियां ने कहा कल भी बरेली मरकज था और आज भी है। कयामत तक बरेली ही मरकज रहेगा। हम किसी हम सिर्फ काजी-ए-हिन्दुस्तान असजद मियां को अपना रहबर मानते हैं।
उलमा की तकरीर के बाद मदरसा जामियातुर रजा में लाखों लोगों ने असर और मगरिब की नमाज अदा की। इसके बाद शाम को 07 बजकर 14 मिनट पर ताजुश्शरिया के कुल की रस्म अदा की गई। फातिहा फैजू नबी और कारी शरफुद्दीन और शिजरा शरीफ मुहद्दिस-ए-कबीर जिया उल मुस्तफा ने पढ़ा। काजी-ए-हिन्दुस्तान सज्जादानशीन मुफ्ती मोहम्मद असजद रजा खां कादरी ने देश में अमन-ओ-अमान और फिलस्तीन के मुसलमानों की हिफाजत के लिए खुसूसी दुआ की। इसी के साथ दो दिवसीय उर्स का समापन हो गया। उर्स की व्यवस्थाओं में हाफिज इकराम रजा खां, डॉक्टर महेंदी हसन, शमीम अहमद, समरान खान, कौसर अली, यासीन खान, मोईन खान आदि शामिल रहे।
