UPPCL: चहेताें को दिलाने की चाह ने दो साल रोक दिया बिलिंग साफ्टवेयर का टेंडर

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Edited By Amrit Vichar
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दो वर्षों में कई बार टेंडर निकला, लेकिन नहीं हो सका फानइल लखनऊ। बीते दो वर्षों यानि की वर्ष 2018 से अभी तक बिजली कम्पनियों के बिलिंग सॉफ्टवेयर का टेंडर फाइनल नहीं हो सका है। ऐसा नहीं होने से विभाग को अभी तक साफ्टवेयरों को दुरुस्त कराने में करोड़ों रुपये खर्च हो गए हैं। वहीं …

दो वर्षों में कई बार टेंडर निकला, लेकिन नहीं हो सका फानइल

लखनऊ। बीते दो वर्षों यानि की वर्ष 2018 से अभी तक बिजली कम्पनियों के बिलिंग सॉफ्टवेयर का टेंडर फाइनल नहीं हो सका है। ऐसा नहीं होने से विभाग को अभी तक साफ्टवेयरों को दुरुस्त कराने में करोड़ों रुपये खर्च हो गए हैं। वहीं प्रदेश के बिलिंग व्यवस्था के साथ ही लाखों उपभोक्ता प्रभावित हो गए। बताया जा रहा है कि टेंडर निकलता है और कैंसिल हो जाता है। इसके पीछे कुछ अभियंताओं की लाबिंग है। वे अपनी—अपनी कंपनियों को टेंडर दिलाना चाह रहे हैं। इस वजह से दो वर्षों से अभी तक टेंडर नहीं फाइनल हो सका।
उ.प्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने गुरुवार को टेंडर के संबंध में ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा से शक्तिभवन उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस दौरान एक लिखित लोकमहत्व प्रस्ताव सौपते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि टेंडर को अभी तक दो वर्षों तक क्यों लटकाया गया, दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पूरे मामले की गम्भीरता को देखते हुए अपर मुख्यसचिव को पूरे मामले की गम्भीरता से छानबीन व कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को आश्वासन दिया कि मामला गंभीर है सरकार कठोर कदम उठाएगी पूरे मामले की जांच होगी। बता दें कि पूरे प्रदेश के लिए बिलिंग सॉफ्टवेयर जो काम कर रहे है उसमे वर्तमान में शहरी क्षेत्र ने एचसीएल व ग्रामीण क्षेत्र में फ्लुएन्ड्ग्रिड द्वारा देखा जा रहा दोनों की प्रोजेक्ट टाइम लाइन पूरी हो गयी है। एक का थोड़ा समय बाकी है। सभी को पता है कि आए दिन इसमे कमियां आती रहती है। पिछले वर्ष 2018 से अनेकों बार नया टेंडर निकला। लेकिन फाइनल नहीं हुआ। जब भी पता किया गया तो पता चला की शक्तिभवन में तैनात कुछ अभियंता अपनी अपनी लबिंग में लगे हैं और टेंडर निकलता है फिर कैंसिल होता है। यह बात उच्च प्रबंधन के भी संज्ञान में है जो बहुत ही गंभीर मामंला है। एक बार डाटा सेंटर बंद भी हो चुका है। आए दिन इसमे सुधार के लिए करोड़ों खर्च हो रहा जो बहुत गंभीर मामला है, पूरा सिस्टम एक ही सॉफ्टवेयर व शिकायती पत्र पर इंटीग्रेटेड होना चाहिए। लेकिन यहां पर 25 से ज्यादा अप्लीकेशन और एप्प अलग—अलग कम्पनियों के ऐसी सिस्टम में इंटेग्रेटेड है। यदि नया टेंडर फाइनल हो जाता तो सभी सुविधा एक ही साथ ली जा सकती है। अवधेश वर्मा ने मांग किया कि अविलंब बिलिंग की नयी व्यवस्था लागू कर, पूरे बिलिंग, आईटी विंग की उच्च स्तरीय तकनीकी कमेटी से जांच कराई जाय। जिससे सामने आ सके कि अब तक कितनी फिजूल खर्ची हुई है इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
गौरतलब है कि पिछले लगभग पांच वर्षो से 70 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को उनकी सिक्योरटी पर ब्याज सिर्फ इसलिए नहीं मिला, क्योंकि उनकी जमा सिक्योरटी जीरो फीड है या नाम मात्र है।

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