उत्तराखंड : हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी को दी अग्रिम जमानत

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Published By Deepak Mishra
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नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा ने 29 दिसंबर को यह आदेश दिया। अधिकारियों के मुताबिक, उधम सिंह नगर जिले के जसपुर थाने में नौ मई 2025 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 और 351(2) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उससे कथित रूप से शारीरिक संबंध बनाए और बाद में विवाह करने से इनकार कर दिया।

याचिकाकर्ता कुमार के वकील ने अदालत में दलील दी कि ये संबंध आपसी सहमति से बनाए गए थे, महिला बालिग व समझदार थी और उनके मुवक्किल ने विवाह का कोई वादा नहीं किया था। आरोपी के वकील ने अदालत में यह भी कहा कि उसके मुवक्किल का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

अदालत ने कहा कि सहमति से बने हर रिश्ते को शादी के झूठे वादे पर आधारित रिश्ता नहीं कहा जा सकता और वादा तोड़ना तभी अपराध माना जाता है, जब शुरुआत से ही शादी करने का कोई इरादा न हो हालांकि, इस मुद्दे का निर्धारण केवल मुकदमे के दौरान ही किया जा सकता है।

अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में याचिकाकर्ता को निजी मुचलके और दो जमानती पेश करने पर अग्रिम जमानत के तहत रिहा कर दिया जाए।

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