झुग्गी बस्ती के 140 बच्चों ने देखी देशभक्ति फिल्म 'इक्कीस', हजरतगंज पुलिस ने सोशल पुलिसिंग से की नववर्ष की शुरूआत
थाने के मंदिर में सुंदरकांड का पाठ, बच्चों को कराया भोजन
लखनऊ, अमृत विचार: हजरतगंज पुलिस ने नववर्ष की पहले दिन राजभवन उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले 140 बच्चों को देशभक्ति पर आधारित फिल्म ‘इक्कीस’ दिखाई। इसके बाद भोजन कराया। बच्चे पुलिसकर्मियों के साथ परिवार की तरह घुलमिल गए।
इंस्पेक्टर हजरतगंज विक्रम सिंह, एसएसआई अमित सिंह ने नावेल्टी एमजीएस सिनेमा में सुबह का विशेष शो बुक किया। फिल्म ब्रिगेडियर मदन लाल खेत्रपाल के बेटे सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल पर बनी है। इस फिल्म में अभिनेता धर्मेंद्र ने अंतिम बार अभिनय किया। इसमें वह ब्रिगेडियर मदन लाल खेत्रपाल की भूमिका निभा रहे थे। यह फिल्म 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध में बसंतर की लड़ाई के दौरान महज 21 साल की उम्र में शहीद हुए जांबाज अरुण खेत्रपाल के जीवन और बलिदान पर आधारित है। बच्चों के साथ फिल्म देखने के दौरान डीसीपी मध्य विक्रांत वीर, एडीसीपी मध्य जितेंद्र दुबे, एसीपी हजरतगंज विकास जायसवाल, अतिरिक्त इंस्पेकटर सुधाकर सिंह, एसआई निशा यादव, एसआई सुधा दीक्षित, एसआई प्रदीप यादव, हेडकांस्टेबल अनुराग यादव, वसीम समेत कई पुलिसकर्मी मौजूद थे।
थाने में सुंदरकांड व भंडारे का आयोजन
फिल्म दिखाने के बाद पुलिस टीम बच्चों को लेकर थाने में पहुंची। जहां परिसर स्थित रूद्रेश्वर महादेव मंदिर में सुंदरकांड का पाठ हुआ। सभी ने हवन-पूजन किया। बच्चों को प्रसाद व मिठाईयां खिलाई गई। इसके बाद सभी को भोजन कराया गया। देर शाम तक भंडारे में प्रसाद वितरण चलता रहा।
फिल्म इक्कीस की कहानी
वर्ष 2000 में 80 वर्षीय ब्रिगेडियर मदन लाल तीन दिन की पाकिस्तान यात्रा पर आते हैं। दरअसल, मदन कॉलेज रीयूनियन के लिए आए हैं। वह अपने पैतृक गांव सरगोधा में अपना पुश्तैनी घर देखने की ख्वाहिश रखते हैं। वहां उनकी मेजबानी पाकिस्तानी ब्रिगेडियर जान मोहम्मद निसार करते हैं। निसार अपने परिवार से किसी ‘सच’ को उजागर करने की बात करते हैं, जो अंत तक रहस्य बना रहता है। वर्तमान से अतीत में आती-जाती कहानी अरुण के जीवन की परतें खोलती है। अरुण युद्ध में हिस्सा लेने को लेकर उत्साहित है। उसकी मां उसे शेर की तरह लड़ने की सीख देकर विदा करती है। मोर्चे पर पहुंचने पर कमांडर हनूत सिंह उसे युद्ध में शामिल करने से मना कर देते हैं, क्योंकि उसने यंग ऑफिसर्स कोर्स पूरा नहीं किया है। वरिष्ठ सूबेदार सगत सिंह अरुण को टैंक और युद्ध रणनीतियों का प्रशिक्षण देते हैं। अपनी योग्यता साबित करने के बाद अरुण को रिजर्व के तौर पर युद्ध में शामिल किया जाता है। इसके बाद उसकी यात्रा युद्ध के मैदान से होते हुए देश के लिए प्राण न्योछावर करने तक पहुंचती है।
