कैसे मिलेगा इलाज ? विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में उद्देश्य से भटके 34 ट्राॅमा सेंटर्स
लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मरीजों के त्वरित इलाज के उद्देश्य से स्थापित किए गए 36 ट्रामा सेंटर बदहाली का शिकार हैं। इनमें स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत संचालित 34 ट्रामा सेंटरों में न तो विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही सीटी स्कैन जैसी जरूरी जांच सुविधाएं। हालात यह हैं कि करोड़ों रुपये की लागत से बने ये ट्रामा सेंटर सामान्य अस्पतालों की तरह काम कर रहे हैं। जबकि गंभीर मरीजों को गोल्डन आवर में इलाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार स्टेट ट्रामा केयर पालिसी बना रही है।
शासन की ओर से ट्राॅमा सेंटरों के संचालन के लिए न केवल उपकरणों, साज-सज्जा और संसाधनों के लिए बजट उपलब्ध कराया जा चुका है, बल्कि डॉक्टरों समेत पूरे स्टाफ के 50 पद प्रत्येक ट्राॅमा सेंटर के लिए सृजित कर भेजे गए हैं। हकीकत है कि जबतक विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती और जांच सुविधाएं शुरू नहीं होतीं, तब तक ट्रामा सेंटर अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएंगे।
प्रत्येक ट्रामा सेंटर के लिए पद सृजित
प्रत्येक ट्रामा सेंटर संचालन के लिए दो एनेस्थेटिस्ट, दो आर्थोपैडिक सर्जन, दो जनरल सर्जन और तीन इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के पद स्वीकृत हैं। इसके साथ ही 15 स्टाफ नर्स, ओटी टेक्नीशियन, एक्स-रे व लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग अटेंडेंट और मल्टी टास्क वर्कर के पद भी तय किए गए हैं।
कहां है ट्राॅमा सेंटर्स
अलीगढ़, अमेठी, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बांदा, बाराबंकी, बस्ती,भदोही, बिजनौर, बुलंदशहर, इटावा, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, जालौन, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, कौशांबी, लखीमपुर खीरी, लखनऊ जानकीपुरम, मुरादाबाद, मुजफ्फर नगर, प्रतापगढ़ ,लालगंज, प्रयागराज, सहारनपुर, सीतापुर, उन्नाव, वाराणसी,औरैया।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए लोक सेवा आयोग में अधियाचन भेजा गया है। सरकारी सेवा में आकर्षण बढ़ाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों को सीधे ग्रेड टू में ज्वाइनिंग दी जा रही है। फिलवक्त उपलब्ध चिकित्सकों के माध्यम से ट्रामा सेंटर्स संचालित हो रहे हैं। डिजिटल एक्स-रे समेत अन्य समस्त सुविधाएं उपलब्ध हैं।
डॉ.रतन पाल सिंह सुमन, स्वास्थ्य महानिदेशक उप्र.
