धर्मांतरण मामला : केजीएमयू में फोर्स का पहरा, आक्रोश में शिक्षक-नर्स और कर्मचारियों ने दे डाली ये चेतावनी...

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) की महिला रेजिडेंट से यौन शोषण, गर्भपात और धर्मांतरण के लिए उकसाने वाले आरोपी डॉक्टर रमीज उर्फ रमीज उद्दीन नायक शुक्रवार को पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है, लेकिन बावजूद इसके केजीएमयू में माहौल शनिवार को भी गर्म रहा है। इसके पीछे की वजह शुक्रवार को हुआ हंगामा बताया जा रहा है। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर पूरे परिसर में जगह-जगह पुलिस और पीएसी बल की तैनाती रही हैं।

दरअसल, शुक्रवार को हुये हंगामें के बाद इस मामले में कुलपति कार्यालय में जबरन घुसने और तोड़फोड़ करने के मामले में केजीएमयू के चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरएएस कुशवाहा ने करीब 200 अज्ञात अराजकतत्वों के विरुद्ध चौक कोतवाली में तहरीर दी थी। जिसके बाद केजीएमयू के शिक्षकों, नर्सिंग ऑफिसर और कर्मचारियों को कार्रवाई का इंतजार है। शिक्षक संघ की तरफ से कहा गया है कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं होती है, तो सोमवार सुबह शिक्षक संघ, नर्सिंग ऑफिसर और कर्मचारी बैठक करेंगे और आंदोलन की रणनीत तैयार करेंगे।

राजकीय नर्सेज संघ, केजीएमयू के सचिव सत्येन्द्र कुमार ने कहा कि संस्थान परिसर में हाल के दिनों में हुये उत्पात और अराजकता की घोर निंदा करता है, एक ओर जहाँ संस्थान में इस तरह की  अनैतिक गतिविधियों से संस्थान की छवि धूमिल हुई है वहीं दूसरी ओर संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों व आने वाले मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हुए हैं, राजकीय नर्सेस संघ इन अराजक तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग करता है साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति रोकने के लिए कड़े नियम और सख्त क़ानून बनाने जाने का आग्रह करता है।

उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महासचिव अतुल मिश्रा ने कहा है कि KGMU में वाइस चांसलर के ऑफिस में हुई घटना की कड़ी निंदा करता हूँ और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और चांसलर से इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग करता हूँ। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में वाइस चांसलर जैसे प्रतिष्ठित पद पर बैठी एक महिला का महिला आयोग की उपाध्यक्ष के सामने अपमान किया गया। अगर सरकार उचित कार्रवाई नहीं करती है, तो राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद को एक फैसला लेना पड़ेगा, जिसमें राज्य के 12 लाख कर्मचारी शामिल होंगे और इससे ज़रूरी सेवाओं पर भी असर पड़ेगा।

यह था मामला 

शुक्रवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में लव जिहाद मामले को लेकर शुक्रवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को कुलपति से मिलने के लिए कथित तौर पर लगभग 10 मिनट तक खड़ा रखा गया।

आरोप है कि इसके बाद भी कुलपति से मुलाकात नहीं हो सकी। इससे नाराज उनके समर्थकों ने प्रशासनिक भवन के बाहर नारेबाजी की, इतना ही नहीं इस दौरान कुलपति कार्यालय के बाहर खड़े कुछ संगठनों के लोगों ने अंदर जाने का प्रयास किया। जिससे वहां भारी हंगामा हो गया। हिन्दू संगठनों और उपद्रवियों ने कुलपति कार्यालय पर कब्जा कर लिया। हालात बिगड़ते देख कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद पीछे के गेट से चुपचाप कार्यालय छोड़कर निकल गई। काफी देर तक कुलपति कार्यालय में हंगामा और नारेबाजी होती रही। उपद्रवियों ने कुलपति चैंबर के बाहर बैठे कर्मचारियों को खदेड़ दिया। केजीएमयू के वरिष्ठ अधिकारियों ने लोगों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी किसी की सुनने को तैयार नहीं थे। 

महिला प्रोफेसर के उत्पीड़न मामले को दबाने का आरोप

अपर्णा यादव ने कहा कि ब्लड एड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की महिला प्रोफेसर ने एक पुरुष प्रोफेसर पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। जिसकी जांच विशाखा कमेटी ने की। लेकिन दोषी पर कार्रवाई के बजाय पीड़िता को ही दबा दिया गया। आरोपी को बचाया गया। इस मेल को आयोग गंभीरता से देख रहा है। साथ ही धर्मातरण के मामले में आरोपी रमीज के सहयोगियों के बारे में भी जांच की जा रही है।

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