प्रदेश में एसआईआर पर 19 को पहली सुनवाई, 403 विधानसभा क्षेत्रों में तैयारियां पूरी, 1.04 करोड़ मतदाताओं को भेजे जा रहे नोटिस
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत अब सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। ड्राफ्ट लिस्ट जारी करने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में सुनवाई की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। पहली सुनवाई 19 जनवरी को होने की संभावना है।
आयोग ने रविवार से उन मतदाताओं को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है, जिनका रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं पाया गया है। प्रदेश में ऐसे मतदाताओं की संख्या करीब 1.04 करोड़ बताई जा रही है। नियमों के अनुसार नोटिस जारी होने के सात दिन बाद सुनवाई की तिथि निर्धारित की जाती है। चूंकि रविवार और राजपत्रित अवकाश में सुनवाई नहीं होती, इसलिए पहली सुनवाई 19 जनवरी को तय मानी जा रही है।
एसआईआर में 2.89 करोड़ नाम हटाए गए
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इनमें मृत्यु हो जाना, राज्य परिवर्तन, अन्य स्थान पर नाम दर्ज होना, लंबे समय से अनुपस्थित रहना या निर्धारित प्रपत्र जमा न करना जैसे कारण शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान 4 नवंबर 2025 से शुरू होकर 26 दिसंबर 2025 तक चला। इस दौरान कई बार समय-सीमा भी बढ़ाई गई। अभियान के तहत प्रदेश के लगभग 15.44 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की गहन जांच की गई।
छह फरवरी तक दर्ज करा सकेंगे दावा और आपत्ति
चुनाव आयोग की ओर से नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाता 6 फरवरी तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि जिन मतदाताओं का पता नहीं चल पा रहा था, जो लापता हैं या जिनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए वर्ष 2003 की एसआईआर सूची में शामिल होने का प्रमाण या चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं। आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, अद्यतन और पारदर्शी बनाना है, ताकि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि या फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे। सुनवाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
