सिडबी कर रहा 15 करोड़ तक का फाइनेंस, सूक्ष्म खाद्य उद्योग में 35 प्रतिशत की सब्सिडी पाने के लिए लेना होगा लोन
लखनऊ, अमृत विचार : यदि आपका एमएसएमई (MSME) यानी की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम है और उसे आप बढ़ाना चाहते हैं,तो सिडबी आपकों 100 फीसदी फाइनेंस की सुविधा दे रहा है, हालांकि यह सुविधा सिडबी मशीनरी की खरीद पर दे रहा है। जिसमें आप 15 करोड़ तक की मशीनरी खरीद सकते हैं और अपने उद्योग को नई उचाईयों पर ले जा सकते है। यह जानकारी सिडबी के जनरल मैनेजर जय कुमार गुप्ता ने शुक्रवार को अमृत विचार के साथ बातचीत करते हुये दी है।
दरअसल, राजधानी लखनऊ में इण्डियन इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन एवं उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से इण्डियन फूड एक्सपो - 2026 का आयोजन किया गया है। इस दौरान सिडबी के जनरल मैनेजर जय कुमार गुप्ता ने बताया कि सिडबी से फाइनेंस कराने का उद्यमियों को सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन्हें कम पेपर वर्क करना पड़ता है, साथ ही वह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं, कार्यालय आने की जरूरत नहीं। ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होते ही अप्रूवल की कार्रवाई की जाती है, इस बीच केवल एक बार सिडबी की तरफ से संबंधित यूनिट का निरीक्षण किया जाता है। इसके बाद मानक पूरे होने पर फाइनेंस में कोई समस्या नहीं होती। इसके अलावा बैंक की तुलना में ब्याज दर भी कम होता है।
सूक्ष्म उद्योगों के लिए जानिये क्या है खास

PM एफएमई योजना, केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की तरफ से शुरू की गई एक केंद्रीय योजना है, जिसका लक्ष्य देश के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता देकर उन्हें आधुनिक बनाना है, जिससे कि "आत्मनिर्भर भारत" अभियान को मजबूती मिल सके। यह कहना है खाद्य प्रसंस्करण के उप निदेशक डॉ.एमपी.सिंह का। वह इण्डियन फूड एक्सपो - 2026 में उद्यमियों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सूक्ष्म उद्योगों को 35 फीसदी सब्सिडी देने की व्यवस्था पीएम एफएमई योजना के तहत है, इसमें 10 लाख तक सब्सिडी मिलती है, लेकिन इसके लिए इस उद्यम से जुड़े व्यक्ति को बैंक से लोन लेना जरूरी होता है। इसके साथ ही युनिट का मैप, प्लांट की मशीनरी आदि अप्रूव्ड होनी चाहिए। उसके बाद ऑनलाइन आवेदन भी किया जाता है, तभी इसका लाभ सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम से जुड़े उद्यमी को मिल सकता है।
खाद्य प्रसंस्करण यूनिटों को दी जानें वाली सहायता
1. उन्नयन के लिए विद्यमान असंगठित खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की अनुदान सहायता से परियोजना लागत की 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड अनुदान सहायता ।
2. निर्धारित अधिकतम सीमा तक पूंजी व्यय के लिए स्वंय सहायता समूहों, एफपीओ, सहकारिताओं को परियोजना लागत की 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड अनुदान सहायता।
3. वर्किंग कैपिटल के रूप में खाद्य प्रसंस्करण में कार्यरत स्वयं सहायता समूहों के प्रति सदस्य को 40,000/- रुपये की दर से प्रारम्भिक पूंजी।
4. निर्धारित अधिकतम सीमा तक कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए परियोजना लागत की 35% क्रेडिट लिंक्ड अनुदान सहायता।
5. निर्धारित सीमा तक व्यय के 50% तक बिक्री और ब्रांडिग के लिए सहायता ।
समाचार अपडेट किया जा रहा है...
