केंद्र की नई बिजली नीति पर बड़ा बवाल: तय समय में दरें स्वतः बढ़ेंगी तो उपभोक्ताओं पर बोझ! वैधानिक आपत्ति दर्ज

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार : प्रस्तावित राष्ट्रीय विद्युत नीति–2026 में तय समय-सीमा के भीतर बिजली दरें लागू करने के प्रावधान को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष वैधानिक आपत्ति दर्ज कराई गई है। केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को भेजे विधिक पत्र में इस व्यवस्था को विद्युत अधिनियम–2003 के प्रावधानों के विरुद्ध बताया है।

समिति के सदस्य ने शनिवार को कहा कि प्रस्तावित नीति में यह व्यवस्था की गई है कि यदि राज्य विद्युत नियामक आयोग निर्धारित समय-सीमा में बिजली दरें तय नहीं कर पाते हैं, तो एक अप्रैल से नई दरें स्वतः लागू हो जाएंगी। यह प्रावधान उपभोक्ता हितों के खिलाफ है और इससे आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ेगा।

अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले वर्षों के अनुभव से स्पष्ट है कि बिजली कंपनियां अक्सर गलत और बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के आधार पर दरों में वृद्धि की मांग करती हैं। हालांकि खुली जनसुनवाई में ऐसे कई दावे खारिज कर दिए जाते हैं। इसके बावजूद यदि तय समय के नाम पर दरें स्वतः लागू हो जाती हैं, तो उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ेगा।

उन्होंने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार को राष्ट्रीय विद्युत नीति बनाने का अधिकार है, लेकिन उसके प्रावधान विद्युत अधिनियम–2003 की धाराओं के विपरीत नहीं हो सकते। उनका आरोप है कि प्रस्तावित नीति में कई अन्य व्यवस्थाएं भी कानून और उपभोक्ता हितों के प्रतिकूल हैं।

सलाहकार समिति के सदस्य ने उस प्रावधान पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें लागत वसूली, मांग शुल्क और ऊर्जा खरीद लागत की राशि तत्काल उपभोक्ताओं से वसूलने की बात कही गई है। उनका कहना है कि इससे आम उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक दबाव पड़ेगा।

उन्होंने मांग की है कि बिजली कंपनियों पर बकाया लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के अधिशेष का पूरा लाभ उपभोक्ताओं को दिया जाए, न कि नई दरें लागू कर उनकी जेब पर अतिरिक्त भार डाला जाए।

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