संघर्ष की कहानी : महज दस साल के थे अलंकार...सिर से उठ गया था पिता का साया 

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देकर बरेली से लखनऊ और दिल्ली तक भूचाल लाने वाले कानपुर निवासी पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री की संघर्ष की कहानी लंबी है। उनके करीबी लोग बताते हैं कि जब वह करीब 10 वर्ष के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। 

घर में बड़े बेटे होने के नाते जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ रहा है। उनकी माता गीता अग्निहोत्री ने कठिन परिस्थितियों में परवरिश की। अलंकार ने 12वीं तक की पढ़ाई कानपुर में की। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश में 21वां स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बी-टेक किया था, लेकिन वह सिविल सेवा में जाना चाहते थे।

परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए आईटी कंपनी में 10 साल तक कंसल्टेंट की नौकरी की। पीसीएस अफसर बनने में उनकी मां के साथ पत्नी आस्था मिश्रा ने बड़ा साथ दिया। यूपी पीसीएस परीक्षा में अलंकार अग्निहोत्री ने 15वीं रैक हासिल की थी।

आवास के गेट पर सबसे पहले हैशटैग यूजीसी रोल बैक पोस्टर लहराया
इस्तीफा देने के बाद सबसे पहले अलंकार अग्निहोत्री ने एडीएम कंपाउंड स्थित अपने सरकारी आवास के मुख्य गेट पर येलो रंग का पोस्टर लहराया। जिस जगह पर खड़े हुए उसके पीछे उनकी नेम प्लेट लगी थी। पोस्टर में लिखा कि हैशटैग यूजीसी रोल बैक..., काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों का यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान। बायकॉट बीजेपी और बायकॉट बाह्मण एमपी-एमएलए।

एडीएम सिटी बोले, सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई बात
अलंकार अग्निहोत्री द्वारा डीएम कैंप कार्यालय में बंधक बनाए रखने के लगाए गए आरोपों पर जिला प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। डीएम के हवाले से एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने वीडियो बाइट जारी करते हुए कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री स्वेच्छा से डीएम कैंप कार्यालय आए थे।

एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने कहा है कि वार्ता के दौरान उन्हें समझाने का प्रयास किया। उनसे कहा गया कि कोई दिक्कत है दो से तीन दिन छुट्टी ले सकते हैं और कोई और दिक्कत है तो हमें बताएं, सक्षम स्तर पर बताएंगे लेकिन समझाने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट कहते रहे कि नहीं, आप लोग मुझको समझ नहीं पा रहे हैं। हमारी बातों को इंकार करते रहे। इस बीच डीएम सर की फेमिली से लगातार फोन आ रहा था। सिटी मजिस्ट्रेट संग कॉफी पी, बातचीत बड़े सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, हम लोगों को लग रहा था कि सिटी मजिस्ट्रेट समझ गए हैं, लेकिन बाद में उनका बयान आया कि हमें बंधक बनाकर रखा, यह सुनकर हम सबको बड़ा खराब लगा, हतप्रभ रह गए कि आखिर सिटी मजिस्ट्रेट ऐसा बयान कैसे दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बेहतर माहौल में बातचीत हुई थी, आज भी डीएम मिलने के लिए तैयार थे। उनके पिताजी की देर रात से तबीयत ज्यादा खराब हो गयी है। आज डायलिसिस की नौबत आ गयी, इसलिए वह अस्पताल चले गए। हम लोगों से बातचीत करने के लिए कह गए, इस पर सिटी मजिस्ट्रेट से बात की गयी पर सिटी मजिस्ट्रेट हठी हो गए हैं, वह कोई बात सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।

 

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