टीबी मुक्त भारत अभियान में सामूहिक भागीदारी आवश्यक : अमित कुमार घोष
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह जन-आंदोलन बन चुका है, जिसमें सरकार, मीडिया, विकास साझेदारों और समुदाय की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। गुरुवार को टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार एवं ग्लोबल हेल्थ स्ट्रैटेजीज द्वारा संयुक्त रूप से राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए अमित कुमार घोष ने कहा कि प्रदेश में पोर्टेबल एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया है, जिससे बिना लक्षण वाले टीबी रोगियों की पहचान संभव हो रही है। साथ ही समुदाय स्तर पर अत्याधुनिक एनएएटी (मॉलिक्यूलर) जांच को प्राथमिकता दी गई है। अमित घोष ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 930 एनएएटी मशीनें कार्यरत हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी मरीज को गुणवत्तापूर्ण जांच के लिए दूर न जाना पड़े।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि 7 दिसंबर 2024 से 17 जनवरी 2026 तक प्रदेश में कुल 3.02 करोड़ जोखिम वाली आबादी की स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान 81.29 लाख एक्स-रे तथा 24.79 लाख एनएएटी परीक्षण किए गए, जिसके परिणामस्वरूप 7.33 लाख टीबी रोगियों की पहचान हुई। उन्होंने कहा कि इनमें लगभग 1.69 लाख ऐसे रोगी शामिल हैं, जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे, जो प्रोएक्टिव स्क्रीनिंग एवं उन्नत डायग्नोस्टिक्स की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि सीएसआर के तहत राज्य को चार मॉड्यूल के साथ 74 ट्रू-नेट मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही 75 एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों के लिए क्रय आदेश जारी किए जा चुके हैं, जिससे टीबी स्क्रीनिंग एवं प्रारंभिक पहचान की क्षमता और सुदृढ़ होगी। मिशन निदेशक, एनएचएम, डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि वर्ष 2015 की तुलना में टीबी की नई दर में 17 प्रतिशत की कमी आई है।
वर्ष 2017 से 2025 के बीच एनएएटी मशीनों की संख्या 141 से बढ़कर 930 हो गई है, जबकि कल्चर जांच सुविधाएं 5 से बढ़कर 14 हो गई हैं। वर्ष 2025 में टीबी नोटिफिकेशन लक्ष्य के सापेक्ष उपलब्धि 104 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उपचार सफलता दर तथा जांच कवरेज में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उन्होंने बताया कि नि:क्षय मित्र पहल के अंतर्गत अब तक 98.9 हजार नि:क्षय मित्रों द्वारा 10.3 लाख टीबी रोगियों को पोषण किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं रतन पाल सिंह सुमन ने बताया कि अभियान के दौरान 3.04 लाख गंभीर एवं उच्च जोखिम वाले टीबी रोगियों का विशेष आकलन किया गया तथा 5.81 लाख पात्र पारिवारिक संपर्कों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट प्रदान किया गया।
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र भटनागर ने बताया कि फरवरी 2026 से प्रदेश में पुनः 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान प्रारंभ किया जाएगा, जिसमें सांसदों से लेकर पंचायत स्तर तक जनप्रतिनिधियों, आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वैच्छिक संगठनों और मीडिया की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। डॉ. शुभा मिश्रा ने मीडिया से अपील की कि वे टीबी से जुड़े सामाजिक मिथकों को समाप्त करने, समय पर लक्षण पहचान और सरकारी सेवाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने में भागीदार बनें। इस अवसर पर "टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश" विषयक ई-न्यूजलेटर का विमोचन भी किया गया।
