Budget 2026 Expectations: विकास को रफ्तार और महंगाई पर हो लगाम... जानें क्या है एक्सपर्ट्स की राए
लखनऊ अमृत विचार: देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला मोदी सरकार का आगामी केंद्रीय बजट से आम जनता, उद्योग जगत, किसानों, मध्यम वर्ग और युवाओं को काफी उम्मीदें हैं। आर्थिक मंदी, महंगाई और रोजगार जैसी चुनौतियों के बीच इस बजट से विकास को गति देने और आम लोगों को राहत देने की अपेक्षा की जा रही है। मध्यम वर्ग को आयकर में छूट, महंगाई से राहत और आवास ऋण पर प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद अर्थशास्त्र के जानकार व्यक्त कर रहे हैं। वहीं, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य, सिंचाई, कृषि तकनीक और फसल बीमा योजनाओं के माध्यम से लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
उद्योग और व्यापार जगत को सरल कर व्यवस्था, एमएसएमई के लिए सस्ती ऋण सुविधा और निवेश बढ़ाने वाले प्रावधानों की प्रतीक्षा है। साथ ही बुनियादी ढांचे सड़क, रेल, स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश बढ़ाकर आर्थिक विकास को मजबूती देने की उम्मीद की जा रही है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को और सशक्त बनाने के लिए बजटीय प्रावधानों पर भी नजरें टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बजट संतुलित और जन-केंद्रित रहा तो इससे अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी और विकास की रफ्तार तेज होगी।
बजट किसी भी सरकार की मास्टर वित्तीय योजना है जिससे वह देश ही नहीं वहां की जनता भी प्रभावित होती है। आगामी बजट 2026 से पूरे राष्ट्र को एवं उसके प्रत्येक क्षेत्र को कुछ आशाएं एवं उम्मीदें हैं। उम्मीदें कहां तक पूरी हो सकती हैं, यह बजट प्रस्तुति पर ही स्पष्ट हो पाएगा फिर भी इस आगामी बजट से आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के आधार पर कुछ उम्मीदें इंगित हो रही है। आगामी बजट 2026 से लोगों को स्टैंडर्ड टैक्स में छूट, न्यू टैक्स रिजीम के अंर्तगत लोगों को स्टैंडर्ड टैक्स डिडक्शन के अंर्तगत लाभ प्राप्त हो सके। एमएसएमई क्षेत्र के विकास के लिए सुलभ व सस्ता कर्ज मिले, छोटे शहरों तक उद्योग पहुंचे और कैपिटल खर्च 10-15 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 12 लाख करोड़ से अधिक किया जा सकता है। कृषि बजट में बढोत्तरी और जल्दी खराब होने वाली उपज के लिए वेयर हाउसिंग सुविधा का विस्तार हो सकता है।
-डॉ. राहुल कुमार मिश्रा, अर्थशास्त्र विभाग, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय
इस बजट से उम्मीद है कि इनकम टैक्स में राहत खासकर मध्यम वर्ग के लिए नए टैक्स स्लैब में छूट की या सुधार की उम्मीद है। साथ ही सेक्शनों में सुधार से टेक-होम इनकम बढ़ सकती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन का बढ़ना 75 हज़ार से एक लाख रुपये तक होने की मांग से कर्मचारियों की जेब में अधिक पैसा बच सकता है। लॉन्ग टर्म पूंजी लाभ टैक्स में सुधार निवेशकों को शेयर-म्यूचुअल फंड पर टैक्स भार को कम करने की उम्मीद। कुल मिलाकर आम टैक्सपेयर चाहता है कि टैक्स बोझ कम हो, खासकर मध्यम वर्ग और सैलरी वालों के लिए।
-मुकेश वार्ष्णेय, अवकाश प्राप्त वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, पंजाब नेशनल बैंक
.png)
बजट 2026 को लेकर कई महत्वपूर्ण राहतों की उम्मीद है। जिसमें युवाओं के लिए अधिक रोजगार के अवसर, छोटे व्यवसायों को समर्थन, बुनियादी ढांचे का विकास तथा उद्योगों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ एमएसएमई के विकास की मांग प्रमुख रूप से की जा रही है। किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को सुविधाजनक बनाने तथा ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। उद्योग जगत को अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए बेहतर नीतियों और अनुकूल वातावरण की उम्मीद है। स्वास्थ्य और शिक्षा दो ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहां सार्वजनिक खर्च विभिन्न वित्त आयोगों की सिफारिशों के अनुरूप नहीं है। बजट में इन क्षेत्रों के लिए अधिक आवंटन की अपेक्षा की जा रही है। प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसके लिए बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निवेश की आवश्यकता है, ताकि मजबूत घरेलू बुनियादी ढांचा विकसित हो सके और भारत इस क्षेत्र में निर्यातक के रूप में भी उभर सके।
-प्रो. सनातन नायक, अर्थशास्त्र विभाग, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय
केंद्रीय बजट सर्वसमावेशी और भविष्य की चुनौतियों से निपटने वाला होना चाहिए। उम्मीद है कि महंगाई पर नियंत्रण के साथ विकास कार्यो को गति देने वाला बजट हो। अब एआई और तकनीक का युग है जिसमें पूरी दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। हमारा बजट ऐसा हो कि अधिक से अधिक समाज और देश के लिए उपयोगी शोध केंद्रीत बजट आवंटन हो। जिससे हमारा रक्षा क्षेत्र और शिक्षा के साथ चिकित्सा क्षेत्र को मजबूती मिले। हमे कृषि क्षेत्र पर भी पूरा ध्यान देना है क्यो कि आगामी 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य है लेकिन देश की आबादी 2025 तक लगातार बढ़ेगी और इसके बाद स्थायित्व प्राप्त करने की संभावना बताई गई है। इसलिए हमें कृषि क्षेत्र, रोजगार सृजन, स्टार्ट अप संस्कृति और कौशल विकास को और तेजी से आगे बढ़ाना होगा।
-डॉ. राजेश श्रीवास्तव, अर्थशास्त्री
