‘पावन पथ’ और ‘भैरव एन्क्लेव’ में होंगी देश की दुर्लभ वनस्पतियां, NBRI ने भैरव वाटिका में लगाए देश के विलुप्त हो रही वनस्पतियों के पौधे
लखनऊ, अमृत विचार: एनबीआरआई की ओर से तैयार भैरव वाटिका में प्रत्येक राज्य के राजकीय पेड़-पौधों के साथ विलुप्त हो रही दुर्लभ प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। यहां 400 से अधिक हर्बेरियम अलमारियों में क्यूआर-आधारित टैगिंग के माध्यम से पेड़-पौधों की विस्तृत जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकती है। वाटिका का सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने सोमवार को वाटिका का शुभारंभ किया।
बनथरा स्थित महर्षि पराशर जैव-संसाधन केंद्र में बनाए गए ‘पावन पथ’ में प्रकृति सराहना हेतु पौध एवं सहवर्ती वनस्पतियां, विभव एन्क्लेव में संकटग्रस्त वनस्पतियां और ‘भैरव एन्क्लेव’ में राज्य पौध उद्यान सहित प्रमुख जैव-विविधता व संरक्षण सुविधाएं की शुरू की गई हैं। पावन पथ विभिन्न क्षेत्रों की दुर्लभ एवं संकटग्रस्त वनस्पति प्रजातियों को उनके संबंधित क्षेत्रों में प्रदर्शित करता है। इसी प्रकार भैरव एन्क्लेव प्रत्येक राज्य के राजकीय पौधों और महत्वपूर्ण वनस्पतियों का संग्रह होगा। ये अपने आप में देश में किया गया वनस्पतियों का अनूठा प्रयोग है। कार्यक्रम में सीएसआईआर-एनबीआरआई के निदेशक डॉ. एके शासनी और सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध त्रिवेदी भी मौजूद रहे।
एनबीआरआई ने इन प्रौद्योगिकियों का किया हस्तांतरण
कपास उत्पादन वृद्धि एवं पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य सुधार हेतु स्वदेशी रूप से विकसित दो प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण किया गया है। इसके अलावा पांच औषधीय घटकों से युक्त एक पादप-आधारित हर्बल सप्लीमेंट भी विकसित किया गया है। जो पुरुषों में एरोमाटेज एंजाइम के प्रभावी अवरोधन के साथ टेस्टोस्टेरोन स्तर में वृद्धि पाई गई, जबकि इन-विवो अध्ययनों में बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के टेस्टोस्टेरोन में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई।
