Bareilly : शहर में बेरोकटोक बिक और बन रहा खूनी मांझा
जान जोखिम में डालने वाले मांझे की बिक्री, भंडारण और निर्माण पर रोक लगाने के कई बार जारी हुए आदेश, पर आज तक बिक्री जारी
बरेली, अमृत विचार। जानलेवा चाइनीज मांझे की बिक्री, भंडारण और निर्माण पर रोक लगाने के आदेश कई बार जारी हुए, लेकिन मॉनिटरिंग और कार्रवाई के अभाव में बेअसर साबित हुए हैं। शहर से लेकर देहात तक खूनी मांझा बेखौफ बेचा ही नहीं जा रहा है, बल्कि पतंग उड़ाने में उसका इस्तेमाल भी हो रहा है। एनजीटी के आदेश के बाद संयुक्त सचिव की ओर से डीएम, एसएसपी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को जारी पत्र के आधार पर जिले में 27 जनवरी से चाइनीज मांझा एक बार फिर प्रतिबंधित कर दिया गया है, लेकिन अब देखना होगा कि हालिया आदेश कितना कारगर होगा।
लखनऊ के हैदरगंज ओवरब्रिज पर बुधवार को चाइनीज मांझे की चपेट में आकर गर्दन कटने से एमआर शोएब की मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्ती दिखाई है। हालांकि बरेली भी ऐसा शहर बन गया है जहां आए-दिन शहर के चौपुला पुल, शहामतगंज पुल, हार्टमन पुल, कुदेशिया पुल पर खूनी मांझे से किसी की गर्दन तो किसी की नाक कट रही है। बाकरगंज क्षेत्र में एके-47, आसमानी धमाका, आरडीएक्स और खूनी मांझा के नाम से चोरी छिपे तमाम कारीगर जानलेवा मांझा तैयार करते हैं। इस पर रोक लगाने के आदेश तो कई बार हुए हैं, लेकिन असर नहीं हुआ है। एनजीटी के आदेश पर 27 जनवरी को बरेली सहित पूरे प्रदेश में सिंथेटिक मांझा, सीसा लेपित, नायलाॅन डोरी एवं चाइनीज मांझे के निर्माण, भंडारण, उपयोग एवं बिक्री पर रोक लगाई गई, लेकिन फिलहाल यह रोक कागजी ही दिख रही है। इससे पहले 2015 व 2017 में आदेश जारी कर डीएम, एसएसपी को चाइनीज मांझा को प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए थे। कहा गया था कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पतंग उड़ाने के लिए सिंथेटिक मांझा, सीसा लेपित, नायलॉन पतंग डोरी एवं चाइनीज मांझे के निर्माण, भण्डारण, उपयोग एवं बिक्री को उससे होने वाली दुर्घटनाओं के दृष्टिगत प्रतिबंधित किया गया। प्रमुख सचिव गृह की ओर से निर्देशों के अनुपालन में कार्रवाई करने के लिए पत्राचार किया गया। 6 जून 2018 को भी आदेश जारी कर प्रतिबंध लगाने के लिए की गई कार्रवाई का ब्योरा देने के निर्देश दिए गए थे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी रोकथाम के लिए पत्राचार किया, लेकिन सिंथेटिक मांझा, सीसा लेपित, नायलॉन पतंग डोरी एवं चाइनीज मांझे के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक नहीं लगायी जा सकी।
चाइनीज व शीशा लेपित मांझा बनाने वालों पर आठ दिन पहले हुई थी कार्रवाई
बरेली : किला थाना पुलिस ने 27 जनवरी को चाइनीज मांझा के चार सौदागरों को पकड़ा था। चार चाइनीज मांझे की चरखी बरामद हुई। बाकरगंज निवासी अब्दुल रजा, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद अजीम और उवैश खां को पकड़ा। बाहर से चाइनीज मांझा खरीदकर लाकर बरेली में महंगे दाम पर बेचने की बात कबूली थी। वहीं, छीपीटोला निवासी मुशाहिद को गिरफ्तार कर मांझे को धार देने के लिए शीशे के चूरे का इस्तेमाल कर मांझा बनाते हुए पकड़ा था। छावनी में स्थित गीता देवी की बगिया में आरोपी पकड़ा। शीशा लेपित आठ चरखी बरामद की थी।
40 हजार परिवार जुड़े, देश-दुनिया में बिकता है बरेली का मांझा
बरेली: बरेली शहर के बाकरगंज, किला छावनी, अशरफ खां की छावनी सहित कई ऐसे मोहल्ले हैं जहां पर जानलेवा मांझा तैयार हो रहा है। हालांकि कुछ ऐसे भी कारीगर हैं जो कॉटन धागे में जयपुर से पत्थर पाउडर व जड़ी-बूटी को मिक्स कर मांझा बनाते हैं, लेकिन इस तरह का मांझा बनाने वाले वे लोग हैं जो 40 साल से कारोबार कर रहे हैं। बरेली का मांझा देश-दुनिया में बिकता है। राज्य के सभी जिलों के अलावा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, बंगाल आदि राज्यों के साथ फ्रांस, दुबई में भी मांझा जाता है।
एक साल पहले गंधक-पोटाश व कांच मिक्स कर मांझा बनाते हुए हुआ था विस्फोट
बरेली: एक साल पहले यानि 7 फरवरी 2025 को बाकरगंज में अवैध मांझा फैक्ट्री में गंधक, पोटाश और कांच मिलाकर मांझा धार देने की प्रक्रिया के दौरान हुए विस्फोट हुआ था। इसमें फैक्ट्री मालिक अतीक और दो कारीगरों (फैजान, सरताज) की मौत हुई थी। इस घटना के बाद यह खुलासा हुआ कि बरेली में खूनी
