मंत्री का घेराव करने वाले भाजपा विधायक बृजभूषण से जवाब तलब, यूपी अध्यक्ष ने भेजा कारण बताओ नोटिस

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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7 दिन में जवाब नहीं देने पर बढ़ सकती मुश्किलें, महोबा प्रकरण में सियासत गरमाई

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश सरकार में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का महोबा में सरेआम घेराव करना भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक को भारी पड़ता दिख रहा है। मामले में भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी इसे खुली अनुशासनहीनता मान रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने चरखारी से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जवाब तलब किया है।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, विधायक द्वारा सैकड़ों समर्थकों के साथ कैबिनेट मंत्री का काफिला रोकना और कथित रूप से उन्हें बंधक जैसी स्थिति में डालना पार्टी नेतृत्व को नागवार गुजरा है। यह मामला केवल असंतोष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे सरकार और संगठन दोनों की छवि पर सवाल खड़े हुए हैं। यही कारण है कि प्रदेश नेतृत्व ने बिना देरी किए अनुशासनात्मक कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया है।

पूरा मामला 30 जनवरी का है, जब महोबा जिले में जल जीवन मिशन की समीक्षा के दौरान मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला सड़क पर रोक लिया गया। चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत उर्फ गुड्डू अपने क्षेत्र के कई ग्राम प्रधानों और समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और मंत्री से सीधे बातचीत की मांग करने लगे। इस दौरान सड़क पर ही लंबी बहस और हंगामे की स्थिति बन गई।

विधायक का आरोप था कि उनके क्षेत्र में घर-नल-जल योजना के तहत भारी लापरवाही हो रही है। पाइपलाइन डालने के नाम पर सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है, मरम्मत नहीं कराई गई और अधिकारी कथित रूप से लूट-खसोट में लिप्त हैं। ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। विधायक का दावा है कि इसी जनसमस्या को लेकर वे मंत्री से प्रधानों के साथ सीधे बात करना चाहते थे।

हालांकि पार्टी नेतृत्व के संकेत साफ हैं कि मंत्री का सार्वजनिक घेराव किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो विधायक के खिलाफ कड़ी संगठनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। महोबा प्रकरण अब केवल स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर अनुशासन और सत्ता-संगठन संतुलन की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

विपक्ष को मिला हमला करने का मौका

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। जहां एक ओर भाजपा संगठन के भीतर अनुशासन और मर्यादा को लेकर सवाल उठे हैं, वहीं विपक्ष को योगी सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का बड़ा मुद्दा मिल गया है। विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि जब सत्तारूढ़ दल के विधायक ही खुलेआम मंत्री का घेराव कर रहे हैं, तो जमीनी हालात कितने खराब होंगे।

विधायक का पलटवार

नोटिस जारी होने के बाद विधायक बृजभूषण राजपूत ने कहा है कि उन्हें अभी तक कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि वह शनिवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेंगे। राजपूत का दावा है कि उन्होंने कोई अनुशासनहीनता नहीं की, बल्कि जनता की समस्याएं उठाई हैं।

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