संपादकीय: महत्वपूर्ण है मलेशिया

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Published By Monis Khan
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एशिया–प्रशांत की बदलती भू-राजनीति में मलेशिया भारत के लिए एक रणनीतिक धुरी बनता जा रहा है। हिंद महासागर से दक्षिण चीन सागर को जोड़ने वाले मलक्का जलडमरू मध्य के किनारे स्थित मलेशिया उस समुद्री मार्ग की निगरानी में अहम है, जिससे भारत के कुल समुद्री व्यापार का आधे से अधिक हिस्सा गुजरता है। 

ऐसे में कुआलालंपुर के साथ गहराता सहयोग केवल व्यापार नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा और सामरिक संतुलन का प्रश्न भी है। ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में हुए समझौते इस साझेदारी को संस्थागत आधार देते हैं। रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर परियोजनाओं में सहयोग भारत की ऊर्जा विविधीकरण नीति को मजबूती देगा, वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष, सस्ती दवाओं और नर्सिंग सेवाओं में तालमेल दोनों देशों के सामाजिक क्षेत्र को लाभ पहुंचा सकता है। रक्षा क्षेत्र में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और समुद्री सहयोग से हिंद–प्रशांत में भारत की उपस्थिति सुदृढ़ होगी। 

पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला संकट के बीच भारत का क्षेत्रीय सहयोग पर जोर स्वाभाविक है। ‘लुक ईस्ट’ से ‘एक्ट ईस्ट’ की नीति अब आर्थिक और सामरिक दोनों रूपों में परिपक्व हो रही है। मलेशिया, जो आसियान में भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, इस प्रक्रिया का प्रवेश द्वार बन सकता है। 2016 में भारत–आसियान व्यापार 65 अरब डॉलर था, जो 2025 तक 123 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। नए समझौतों के बाद इसमें उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है, विशेषकर सेमीकंडक्टर और डिजिटल क्षेत्र में। 

सेमीकंडक्टर उद्योग में मलेशिया के चार दशकों के अनुभव और मजबूत इकोसिस्टम का भारत को सीधा लाभ मिलेगा। भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और चिप निर्माण को बढ़ावा दे रहा है; ऐसे में संयुक्त निवेश, तकनीकी साझेदारी और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग से भारत आयात निर्भरता घटेगी। मलेशिया को भी विशाल भारतीय बाजार और उत्पादन आधार का लाभ मिलेगा, यह परस्पर पूरकता का उदाहरण है। डिजिटल क्षेत्र में मलेशिया–इंडिया डिजिटल काउंसिल, यूपीआई और पेननेट के जुड़ाव से व्यापार, पर्यटन तथा निवेश में सहजता आएगी। 

भारत की फिनटेक तकनीक को विस्तार मिलेगा। रुपये–रिंगिट में लेन-देन की व्यवस्था डॉलर निर्भरता घटा सकती है। मलक्का जलडमरू मध्य और दक्षिण चीन सागर में चीन–ताइवान–अमेरिका तनाव के कारण समुद्री मार्ग संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में भारत–मलेशिया समुद्री सहयोग का महत्वपूर्ण है। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और सीमा-पार कट्टरपंथ पर समन्वय का निर्णय भी सुरक्षा सहयोग को नया आयाम देता है। 

मलेशिया ने अतीत में क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाया है, किंतु हाल के वर्षों में आतंकवाद विरोधी सहयोग में सक्रियता दिखाई है। मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय रहते हैं, प्रवासी भारतीयों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या, ऐसे में नया वाणिज्य दूतावास, तिरुवल्लुवर केंद्र और छात्रवृत्ति सांस्कृतिक कूटनीति को गहराई देंगे। सोशल सिक्योरिटी समझौता, मुफ्त ई-वीजा और यूपीआई का विस्तार भारतीय कामगारों और पर्यटकों के लिए राहतकारी कदम होंगे।