Bharat Bandh: किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों की हड़ताल, आंशिक रूप से सेवाओं पर असर; बैंक, बाजार और स्कूल रहेंगे बंद
दिल्ली। केंद्रीय श्रमिक संगठनों के एक संयुक्त मंच से जुड़े कर्मचारी एवं श्रमिक केंद्र सरकार की '' मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट समर्थक नीतियों को लेकर अपना प्रतिरोध'' दिखाने के लिए बृहस्पतिवार को एक दिवसीय हड़ताल पर हैं। संयुक्त मंच ने दावा किया कि अन्य मुद्दों के साथ-साथ नए श्रम कानूनों के विरोध में 30 करोड़ श्रमिकों को ''आम हड़ताल'' के लिए लामबंद किया जा रहा है।
'ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस' की महासचिव अमरजीत कौर ने बताया कि देशभर में आम हड़ताल बृहस्पतिवार सुबह से शुरू हो गई। उन्हें असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, ओडिशा और बिहार सहित कई राज्यों से हड़ताल की खबरें मिली हैं। कौर ने कहा कि बैंकिंग, बीमा, डाक, परिवहन, स्वास्थ्य, कोयला और गैर-कोयला खदानें, गैस पाइपलाइन और बिजली क्षेत्र इस हड़ताल से प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों द्वारा भी अपने-अपने क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
श्रमिक संगठनों की तात्कालिक मांगों में चार श्रम संहिताओं एवं नियमों को रद्द करना, बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक तथा 'सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम' को वापस लेना शामिल है। श्रम संघ मनरेगा की बहाली और 'विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025' को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं।
संयुक्त मंच में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), स्वरोजगार महिला संघ (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) शामिल हैं।
केंद्र पर भड़के राहुल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने चार श्रम संहिताओं का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि मजदूरों और किसानों के भविष्य को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मजदूरों और किसानों की सुनेंगे या उन पर किसी "ग्रिप" की पकड़ बहुत मज़बूत है? राहुल गांधी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''आज देश भर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने के लिए सड़कों पर हैं। मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी।''
उनके मुताबिक, किसानों को आशंका है कि (अमेरिका के साथ किया गया) व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ''मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी छिन सकता है। जब उनके (मजदूरों और किसानों के) भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, तब उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ कर दिया गया।'' उन्होंने सवाल किया कि क्या मोदी जी अब सुनेंगे या उन पर किसी "ग्रिप" की पकड़ बहुत मज़बूत है? राहुल गांधी ने कहा, '' मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूं ।
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