Bareilly: रोजगार, युवा सशक्तिकरण और महिलाओं की सुरक्षा-आत्मनिर्भरता पर फोकस
बरेली, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में रोजगार सृजन, युवाओं के कौशल विकास और महिलाओं के आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए व्यापक योजनाओं और उपलब्धियों का खाका प्रस्तुत किया गया।
विभागों में नियुक्तियों और सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने जैसे कदमों से रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर जोर दिया गया। वहीं, कौशल प्रशिक्षण, मुफ्त कोचिंग, डिजिटल सशक्तिकरण और खेल प्रोत्साहन से युवाओं को नई दिशा देने की पहल की गई है। दूसरी ओर, महिला सामर्थ्य, सेफ सिटी, बीसी सखी और सुमंगला जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और आर्थिक भागीदारी को मजबूती देने का दावा किया गया है।
बरेली कॉलेज बरेली प्रो. वंदना शर्मा ने बताया कि योगी सरकार के बजट में स्कूटी से लेकर स्किल डेवलपमेंट तक इस बात का ध्यान रखा गया है, कि बजट में महिलाओं और बालिकाओं की हिस्सेदारी बढ़े। उत्तर प्रदेश में बजट के समय अपराध के जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए उससे यह बात भी स्पष्ट हुई कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों की संख्या में कमी आई है। मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश के उत्तम प्रदेश की ओर बढ़ने की दिशा में एक सही और संतुलित बजट है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की प्रो. अनीता त्यागी ने बताया कि यह बजट विपक्ष की राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं के वास्तविक सशक्तीकरण का बजट है। जहां सुरक्षा भी है, सम्मान भी है और आत्मनिर्भर भारत में महिलाओं की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करने का संकल्प भी है। कुल मिलाकर, यह बजट महिलाओं को केवल कल्याण का लाभार्थी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और सशक्त नागरिक बनाने की नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
बरेली कॉलेज बरेली की प्रो. पूनम रानी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के बजट को यदि समग्र दृष्टि से देखा जाए, तो यह महिलाओं और युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का एक सुविचारित प्रयास प्रतीत होता है। महिलाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता से जुड़ी योजनाओं को सुदृढ़ किया गया है। कन्या शिक्षा, छात्रवृत्ति, स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बजट सकारात्मक संकेत देता है।
बरेली कॉलेज बरेली की डॉ. शीतल गुप्ता ने बताया कि यूपी सरकार के बजट में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया है। बेटियों की शादी के लिए एक लाख रुपए का प्रावधान दिया गया। मेधावी छात्राओं के लिए स्कूटी योजना भी कारगर होगी। महिलाओं के लिए विशेष स्किल योजनाएं के साथ वृद्धावस्था पेंशन की वृद्धि से सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के दृष्टि से महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए।
युवा शैलेंद्र सिंह चौहान के मुताबिक बजट में युवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। प्रशिक्षण और रोजगार योजनाओं से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं को लाभ की उम्मीद है। अब जमीनी स्तर पर योजनाओं का असर दिखना चाहिए। इससे युवाओं को बदलते समय के अनुरूप तैयार होने का मौका मिलेगा। डिजिटल और औद्योगिक निवेश रोजगार बढ़ाने में सहायक होगा।
छात्रा रुहेलखंड विश्वविद्यालय वाणी शंखधार के मुताबिक बजट को युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल लर्निंग को प्राथमिकता दी गई है। स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देकर युवाओं को उद्यमी बनने का अवसर मिला है। रोजगार सृजन की योजनाएं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होंगी। टेक्नोलॉजी और रिसर्च में निवेश से नई संभावनाएं खुलेंगी। ग्रामीण और शहरी युवाओं के लिए समान अवसर पर जोर दिया गया है।
एबीवीपी के आनंद कठेरिया ने बताया कि कौशल आधारित शिक्षा पर जोर स्वागतयोग्य है। इससे युवाओं को रोजगार के लिए बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा। नए उद्योगों और निवेश से नौकरी के विकल्प बढ़ेंगे। बजट युवाओं के लिए भरोसे और उम्मीद का संदेश देता है। रोजगार सृजन और कौशल विकास को प्राथमिकता देना सकारात्मक संकेत है। स्टार्टअप और स्वरोजगार को प्रोत्साहन से नए अवसर बनेंगे। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन युवाओं के भविष्य को दिशा देगा।
समाजवादी छात्र सभा के अविनाश मिश्रा ने बताया कि देश में बढ़ती बेरोज़गारी और महंगाई के बीच बजट ने काफी हद तक युवाओं को निराश किया है। करोड़ों पढ़े-लिखे युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन सरकार रोजगार सृजन, कौशल विकास और स्टार्टअप्स के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं लाई। शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती फीस पर भी बजट मौन है। यह बजट युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
