बाराबंकी बॉबी हत्याकांड: दाग मिटाने की कोशिश करते रहे शोएब, 27 साल पहले जेलर आरके तिवारी की हत्या में आया था नाम
बाराबंकी, अमृत विचार। 27 साल पहले लखनऊ में राजभवन से कुछ दूरी पर जेलर आरके तिवारी हत्याकांड के बाद से बाराबंकी के शोएब किदवई उर्फ बाबी का नाम चर्चा में आया। यहीं से उनका नाम मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़ गया। वह बंकी ब्लाक में ज्येष्ठ प्रमुख भी रहे, वकालत पेशा अपनाया और रहन सहन भी आम कर लिया पर मुख्तार का खास होने की पहचान वह मिटाने में नाकाम रहे। हालांकि ढाई दशक के बाद बाबी की हत्या के निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। बताते चलें कि जेल में सुधार के लिए चर्चित रमाकांत तिवारी की चार फरवरी 1999 को हत्या कर दी गई थी।
लखनऊ के तत्कालीन जिलाधिकारी सदाकांत के आवास से बैठक कर वह शाम सात बजे लौट रहे थे। राजभवन के पास पहुंचते ही बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उन्हें छलनी कर दिया था। बाद में उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी, चर्चित छात्र नेता अभय सिंह समेत दर्जन भर से अधिक लोग नामजद हुए थे। नामजद लोगों में बतौर शूटर बाराबंकी के शोएब किदवई व देवरिया के रामू का भी नाम शामिल था। इस हत्याकांड की जांच के बाद मुख्तार बरी हो गए थे पर शोएब के साथ शार्प शूटर की पहचान ऐसी जुड़ी कि इसे मिटाना मुश्किल हो गया।

जिला मुख्यालय पर डीएम आवास से कुछ दूरी पर रह रहे शुएब ने अपनी छवि बदलने की कोशिश की और बसपा से जुड़कर राजनीति में दांव आजमाया, इसके बाद वह बंकी ब्लाक में ज्येष्ठ ब्लाक प्रमुख बने। आम रहन सहन की ओर बढ़े शोएब ने बाद में वकालत पेशा अपना लिया और तबसे कचहरी में ही समय देने लगे। इतना सब करने के बावजूद वह मुख्तार गैंग से जुड़ी पहचान मिटा नहीं सके। लोगों में उनकी हत्या की वजह को लेकर खासी चर्चा है। बता दें कि शोएब के बड़े भाई जावेद कचहरी में वकील हैं जबकि छोटा भाई इंग्लैंड में है। पत्नी शाजिया से 15 वर्षीय पुत्र अरमान पढ़ाई कर रहा है। इनकी ससुराल लखनऊ के मलिहाबाद में है।
वकीलों का हंगामा, 48 घंटे का दिया अल्टीमेटम
अधिवक्ता शोएब किदवई की हत्या को लेकर वकील समुदाय आक्रोशित हो गया है। दिनदहाड़े हत्या से गुस्साए वकील बड़ी संख्या में पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे बाद में कुछ ही दूरी पर सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिया। वकीलों ने 48 घंटे के भीतर घटना के खुलासे का अल्टीमेटम दिया है। जिला मुख्यालय ही नहीं तहसीलों में वकील प्रदर्शनरत रहे। रामपुर जिले के बाद बाराबंकी में वकील शोएब किदवई की हत्या से अधिवक्ता समाज में खासा गुस्सा फैल गया है। एक के बाद एक घटनाओं को लेकर नाराज वकील पहले पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, जहां पर विरोध जताया गया।
शाम होने तक यह भीड़ बढ़ गई और आक्रोश सड़क पर उतर आया। हंगामा करते हुए वकील अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष नरेन्द्र वर्मा की अगुवाई में नेशनल हाइवे पर बस अड्डे तक पहुंचे और यहां पर सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया। वकील मृत अधिवक्ता का नाम मुख्तार गैंग से जोड़े जाने को लेकर खासे नाराज थे। इसके बाद एसपी से मिलकर दिए गए ज्ञापन में मांग की गई कि इस हत्या की घटना का 48 घंटे के अंदर खुलासा किया जाए। यहां पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष रितेश मिश्र, महामंत्री रामराज यादव आदि मौजूद रहे।

फतेहपुर प्रतिनिधि के अनुसार स्थानीय बार के पदाधिकारियों ने विरोध जताया और जोरदार प्रदर्शन करते हुए पुरानी कचेहरी से विरोध प्रदर्शन करते हुए नवीन कचेहरी परिसर में राज्यपाल को सम्बोधित एक ज्ञापन तहसीलदार वैशाली अहलावत को सौंपते हुए मांग की कि प्रदेश में हो रही अधिवक्ताओं की हत्याओं पर अंकुश लगाने के लिए अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जावे और मृतक अधिवक्ताओं के परिवार को एक एक करोड की आर्थिक सहायता करते हुए दोषियों को फांसी की सजा दी जाये। इस मौके पर निवर्तमान अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद वर्मा, रामलाल वर्मा, इन्द्रेश कुमार शुक्ला, राजीव नयन तिवारी, हरनाम सिंह वर्मा, ओम प्रकाश यादव, गणेश शंकर मिश्रा, प्रदीप कुमार निगम, श्रवण कुमार वर्मा आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
