नेता प्रतिपक्ष ने CM की मौजूदगी में उठाया लोकायुक्त की रिपोर्ट का मुद्दा, बोले माता प्रसाद- चार IAS समेत कई अफसरों पर भ्रष्टाचार की रिपोर्ट सदन में रखें
कार्यवाहक डीजीपी पर उठाए सवाल, एनकाउंटर और रोजगार पर विपक्ष ने सरकार को घेरा
लखनऊ, अमृत विचार: विधानसभा सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में सरकार को कई मोर्चों पर घेरा। उन्होंने भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, एनकाउंटर नीति और रोजगार जैसे अहम मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि चार आईएएस अधिकारियों समेत विभिन्न विभागों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ी लोकायुक्त की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन में भ्रष्टाचार जैसे गंभीर विषय पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई, जबकि आम जनता सबसे ज्यादा इसी समस्या से परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के कई मामले लोकायुक्त के पास लंबित हैं। इसके अलावा जिला पंचायत, नगर पंचायत, समाज कल्याण विभाग समेत अन्य विभागों से जुड़ी शिकायतें भी दर्ज हैं, लेकिन सरकार ने इन मामलों की वर्तमान स्थिति पर सदन को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि यदि लोकायुक्त की सिफारिशों और रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाता, तो सभी सदस्य उसकी समीक्षा कर सकते थे। उन्होंने सदन में एक आईएएस अधिकारी, लखनऊ के जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा संभल की नगर पंचायत की अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी का नाम भी लिया। उन्होंने कहा कि अन्य आईएएस अधिकारियों के नाम भी लिए जा सकते हैं, लेकिन इससे सरकार को असुविधा होगी। उन्होंने लोकायुक्त के कार्यकाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि लोकायुक्त का कार्यकाल कब तक है। लोकायुक्त पिछले आठ वर्षों से पद पर हैं, ऐसे में सरकार को इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हाल के दिनों में आपराधिक घटनाओं में पुलिसकर्मियों के नाम सामने आना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि डीजीपी कार्यालय प्रभावी ढंग से कार्य करता नहीं दिख रहा है और प्रदेश में कार्यवाहक डीजीपी के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय की मंशा के अनुरूप स्थायी डीजीपी की नियुक्ति की मांग की, ताकि पुलिस अधिकारी बिना किसी दबाव के काम कर सकें। एनकाउंटर की घटनाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि किसी का भविष्य बर्बाद करने वाली गलत परंपरा नहीं शुरू होनी चाहिए। यदि आज गलत मिसाल कायम की गई तो आने वाली सरकारें उससे भी आगे बढ़ सकती हैं। गैंगस्टर कानून में संशोधन की मांग करते हुए उन्होंने इसके दुरुपयोग पर भी चिंता जताई।
साइबर अपराधों को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि संगठित साइबर गिरोह आम लोगों को घर बैठे निशाना बना रहे हैं, सरकार को इनके खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगों की बात तो हो रही है, लेकिन छोटे और कुटीर उद्योगों को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल पा रहा। उन्होंने बंद पड़े उद्योगों को फिर से शुरू करने और प्रदेश से बाहर पलायन कर चुके युवाओं को वापस लाने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की। उनके तीखे सवालों के दौरान सदन में कई बार हलचल भी देखी गई, जबकि सरकार की ओर से जवाब की प्रतीक्षा बनी हुई है।
