महाशिवरात्रि: शिवालयों में गूंजे बम-बम भोले के जायकारे, नाथ मंदिरों में जलाभिषेक को उमड़ा आस्था का सैलाब

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। महाशिवरात्रि की धूम रविवार को सारे शहर में देखने को  मिली। तड़के सुबह मंदिरों के कपाट खुलने के बाद डमरू की गूंज और हर-हर महादेव का उद्घोष सुनाई देने लगे। कई मंदिरों में शनिवार देर रात से पूजा अर्चना का दौर शुरू हो गया था। ज्यादातर मंदिरों में रविवार सुबह लंबी कतारो में लगकर श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।

शहर के सातों नाथ मंदिरों में अधिक संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। जलाभिषेक करने के लिए घंटों कतार में खड़ा होना पड़ा। अलखनाथ मंदिर, त्रिवटी नाथ मंदिर, धोपेश्वरनाथ मंदिर, मढ़ीनाथ मंदिर, वनखंडीनाथ मंदिर, पशुपतिनाथ मंदिर, तपेश्वरनाथ मंदिर में भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोग जलाभिषेक करने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। वहीं घरों में भी पूजा अर्चना और उपवास रखकर श्रद्धालुओं ने भोलनाथ से अपने मन की मनोकामनाएं मांगी।

एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि एक कंपनी पीएसी, एक प्लाटून, शहर के सभी थानों की पुलिस फोर्स समेत 50 अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को लगाया गया है, जो मंदिर परिसर से लेकर बाहर तक सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए श्रद्धालुओं की मदद करेंगे। भीड़ को देखते हुए महिला कांस्टेबलों की भी ड्यूटी लगाई गई है। थाना प्रभारी लगातार क्षेत्र में गश्त करते कर रहे हैं। 

ये है नाथ मंदिरों की खासियत
बाबा अलखनाथ मंदिर एक ह जार वर्ष पुराना शहर के प्राचीन मंदिरों में शामिल है। यहां पर पहले घना वन हुआ करता था। यहीं पर संत अलखिया तपस्या कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें पेड़ के नीचे शिवलिंग का पता चला था। खोदाई करने पर वहां स्वयंभू शिवलिंग निकला, जिसे वहां स्थापित किया गया। त्रिवटीनाथ मंदिर का इतिहास 550 वर्ष पुराना है। यहां स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। मान्यता है कि एक चरवाहा तीन वट वृक्षों के नीचे आराम कर रहा था। तब सपने में उसे शिवलिंग की जानकारी हुई। कैंट स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर महाभारत कालीन है। मान्यता है कि अत्रि ऋषि के शिष्य धूम्र की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और ऋषि की इच्छा अनुसार यहां पर शिवलिंग के रूप में प्रतिष्ठित हो गए। सुभाषनगर स्थित तपेश्वरनाथ मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना है। यहां बाबा भालू दास नाम के संत ने कठिन तपस्या की, जिससे भगवान ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए। इसके बाद यहां पर शिवलिंग की स्थापना की गई। इसी तरह से सभी मंदिरों की अलग-अलग विशेषता है।

 

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