पशु काटे या खरोंचे तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं: रेबीज से बचाव के लिए समय पर टीका जरूरी, जानें क्या बोले विशेषज्ञ
लखनऊ, अमृत विचार : भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी के प्रेसिडेंशियल एक्शन प्लान 2026 के अंतर्गत बालरोग विशेषज्ञों के लिए टीकाकरण पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित रस्तोगी ने की।
जनपद के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख सूत्रधार एवं राष्ट्रीय वैज्ञानिक संयोजक डॉ. जयदीप चौधरी ने प्रतिभागियों के टीकाकरण संबंधी विभिन्न सवालों का समाधान किया। उन्होंने बताया कि किसी भी स्तनधारी पशु के काटने या खरोंचने की स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है ताकि रैबीज टीका और इम्युनोग्लोब्युलिन समय पर लगाया जा सके।
आगरा के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएन शर्मा ने बताया कि फ्लू और टाइफाइड के टीके बेहद महत्वपूर्ण हैं, हालांकि ये अभी राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल नहीं हैं। वहीं, डॉ. विनय कुमार मित्तल ने स्पष्ट किया कि बीसीजी टीकाकरण के बाद बाएं हाथ पर निशान बनना सामान्य है और यदि बच्चा जन्म के समय यह टीका नहीं ले पाया हो तो पांच वर्ष की आयु तक लगाया जा सकता है। डॉ. उत्कर्ष बंसल ने जानकारी दी कि हेपेटाइटिस-ए और चिकन पॉक्स के टीके संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के तुरंत बाद लगाए जाने से बीमारी से बचाव संभव है। यह दोनों टीके भी अभी राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा, डॉ. सलमान खान ने बताया कि किशोरावस्था में प्रत्येक बच्चे को ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) का टीका अवश्य लगवाना चाहिए, जो जननांग और मुख से संबंधित कई प्रकार के कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है। कार्यक्रम में कुल 47 चिकित्सकों ने भाग लिया।
