Bareilly: माह-ए-मुकद्दस रमजान और रंगों के त्योहार होली से पहले बाजार गुलजार

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। माह-ए-मुकद्दस रमजान और रंगों के पर्व की आहट के साथ  झुमका सिटी बरेली का बाजार भी तैयार हो गया है। बुधवार को अगर चांद दिखा तो गुरुवार से रमजान की शुरुआत होगी। लिहाजा रमजान से पहले मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के बाजारों में सहरी और इफ्तार के चलते खजला और फेनी की दुकानें सजी दिखीं। दूसरी तरफ फाल्गुन की गुनगुनी धूप के साथ होली की तैयारियां भी तेज हैं। बनारस की कचरी और मेवा की माला होली पर धूम मचाने को तैयार हैं। 

रमजान से पहले शहर की बेकरियों पर खास किस्म की खोया ब्रेड की सबसे ज्यादा डिमांड है। कुतुबखाना के बेकरी संचालक अब्दुल रहमान ने बताया कि रोजा शुरू करने से पहले सहरी के वक्त अक्सर लोग खोया ब्रेड खाना पसंद करते हैं। इसके अलावा बिना खोए की ब्रेड भी बाजार में मौजूद हैं। दोनों ही ब्रेड 80 से 100 रुपये की कीमत में सभी बेकरियों पर बिक रही हैं। रमजान से पहले ही इसकी डिमांड लोगों में बढ़ गई है। साथ ही बनारस और इलाहाबाद की सेंवई ग्राहकों की मांग को देखते हुए स्टॉक में रखी है। उन्होंने बताया कि चांदरात से बिक्री में और भी ज्यादा तेजी आने की उम्मीद है। सैलानी इलाके खजला फैनी तैयार कर रहे रजा साबरी ने बताया कि खजला और फेनी वह खुद तैयार करके बेच रहे हैं। सहरी में खजला और फेनी लोग खाना पसंद करते हैं, इसके बिना सहरी की लज्जत अधूरी है।

रमजान से पहले चढ़ा फलों का बाजार
रमजान से पहले फलों का बाजार चढ़ गया है। श्यामगंज फलमंडी के दुकानदार मोहित पाल ने बताया कि फल के दाम 20 से 30 रुपये प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। खास तौर से खजूर रमजान की वजह से महंगी हुई है। 110 से 120 तक बिकने वाला खजूर का पैकेट 150 से 160 तक बिक रहा है। अजवा, कीमिया और बरबरी खजूर की मांग ज्यादा है। सेब और कीनू के दाम में भी इजाफा हुआ है। सेब अब तक 100 से 110 तक बिक रहा था अब 150 से 160 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।

राफेल की पिचकारी धमाल मचाने को तैयार
सौफुटा रोड पर रंगों और पिचकारी के कारोबारी हरमीत सिंह ने बताया कि इस बार होली पर राफेल से लेकर मिसाइल की पिचकारी खास रहने वाली है। वहीं होली पर क्रिकेट का तड़का बैट वाली पिचकारी से लगेगा। उन्होंने बताया कि इस बार भी होली के बाजार में मोदी और योगी के मुखौटों की डिमांड है, लिहाजा उन्होंने मंगाकर रखे हैं। उन्होंने बताया कि लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ऑर्गेनिक रंग मंगाकर रखे हैं। खास बात ये है कि चॉकलेट समेत दूसरे कई फ्लेवर्स में रंग मौजूद हैं।

चाइना की कचरी से किया किनारा, देसी को अपनाया
ड्रायफ्रूट कारोबारी संजय आनंद ने बताया कि बच्चों को होली हार बनाने का चलन बड़ा है। पहले लोग दामादों और छोटे बच्चों को मेवा के हार पहनाते थे, जिनको घर पर महिलाएं ही तैयार करती थीं। मगर अब उन्होंने इसे तैयार करवाया है। जिसकी कीमत 160 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक है। उन्होंने बताया कि पहले चाइना की कचरी खूब बिकती थी मगर अब लोगों ने देसी की तरफ रुख किया है। जिसमें बनारस की कचरी खास है। आलू के पापड़, मैदा के पापड़, दाल के पापड़,चावल की कचरी, अरारोट की कचरी को ग्राहक पसंद कर रहे हैं। ड्राइफ्रूट्स की डलियां भी खूब बिक रही हैं।

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