प्रयागराज से शुरू हुई थी दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा, 18 फरवरी को पूरे हुए 115 वर्ष
लखनऊ, अमृत विचारः 18 फरवरी 1911 दिन शनिवार को प्रयागराज से दुनिया की पहली आधिकारिक हवाई डाक सेवा की शुरुआत हुई थी। ये उड़ान प्रयागराज से नैनी तक संचालित की गई थी। हवाई डाक सेवा के इस सफर ने 18 फरवरी मंगलवार को 115 वर्ष पूरे कर लिए। वर्ष 1911 प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान हवाई डाक सेवा शुरू हुई थी।
डाक विभाग के अभिलेखों के अनुसार, फ्रांसीसी पायलट मोनसियर हेनरी पिक्वेट ने 6500 पत्रों की खेप लेकर यमुना तट से उड़ान भरी और लगभग 15 किलोमीटर दूर नैनी तक डाक पहुंचाई। यह उड़ान करीब 13 मिनट में पूरी हुई थी।
विमान नैनी जंक्शन के निकट बाहरी क्षेत्र में उतरा था। डाक विभाग का दावा है कि यह विश्व की पहली सरकारी आधिकारिक हवाई डाक सेवा थी। उस समय प्रयुक्त विमान दे हैवीलैंड श्रेणी का था, जिसने डाक परिवहन के क्षेत्र में नया इतिहास रचा।
विभाग के पास था अपना विमान
डाक विभाग के पास वर्षों तक अपना एक विमान भी रहा, जिसका उपयोग डाक परिवहन में किया जाता था। हालांकि लगभग 20 वर्ष पूर्व इस विमान को पुराना और अनुपयोगी घोषित कर शासन की अनुमति से बेच दिया गया। बढ़ते रखरखाव खर्च और तकनीकी कारणों से इसे कंडम घोषित किया गया था।
समय के साथ हाईटेक हुआ डाक विभाग
पोस्टमास्टर जनरल मुख्यालय परिक्षेत्र लखनऊ सुनील कुमार राय के अनुसार हवाई डाक सेवा के 115 वर्ष पूरे होना देश और प्रदेश के लिए गौरव की बात है। विश्व की पहली डाक उड़ान उत्तर प्रदेश की धरती से हुई थी, जो आज भी ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज है। वर्षों में डाक विभाग ने स्वयं को आधुनिक तकनीक से लैस किया है। आज डाकिए डिजिटल उपकरणों से लैस हैं, पार्सल ट्रैकिंग ऑनलाइन हो रही है और स्पीड पोस्ट जैसी सेवाएं देशभर में तेज़ी से संचालित की जा रही हैं।
कोरियर कंपनियां भी लेती हैं सहारा
उन्होंने कहा कि भले ही आज निजी कोरियर एजेंसियों की संख्या बढ़ गई हो, लेकिन देश में सर्वाधिक पत्र और पार्सल परिवहन अब भी डाक विभाग के माध्यम से ही होता है। कई निजी कंपनियां भी दूरस्थ जिलों और राज्यों में अपनी सामग्री पहुंचाने के लिए डाक विभाग की सेवाओं का उपयोग करती हैं।
डाकिए का इंतजार और बदलता दौर
आजादी से पहले डाकिए का इंतजार लोगों के जीवन का अहम हिस्सा हुआ करता था। लोग अपने परिजनों की चिट्ठियों के लिए हफ्तों प्रतीक्षा करते थे। डाकिए के दरवाजे पर पहुंचते ही घर में उत्साह का माहौल बन जाता था। समय बदला, संचार के साधन बदले, लेकिन डाक सेवा का महत्व आज भी कायम है। प्रयागराज से शुरू हुई यह ऐतिहासिक हवाई डाक उड़ान भारतीय डाक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है, जिस पर पूरा देश गर्व करता है।
