Bareilly : चांदनी में दिखा जिंदगी का कड़वा सच, कौमुदी ने छोड़ी गहरी छाप

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। विंडरमेयर थिएटर फेस्टिवल के तीसरे दिन डी फॉर ड्रामा के चर्चित नाटक कौमुदी का प्रभावशाली मंचन हुआ। इसने दर्शकों को गहन भावनात्मक और वैचारिक यात्रा पर ले जाकर जिंदगी के कड़वे सच से रूबरू कराया। अभिषेक मजूमदार के लेखन और निर्देशन में प्रस्तुत नाटक ने सशक्त अभिनय, सटीक मंच सज्जा और प्रभावशाली लाइट डिजाइन के दम पर महोत्सव में अलग पहचान बनाई।

नाटक की कहानी एक प्रतीकात्मक चांदनी रात से शुरू होकर 1960 के दशक के इलाहाबाद तक पहुंचती है। इसमें लगभग नेत्रहीन हो चुके वरिष्ठ अभिनेता सत्यशील की कहानी दिखाई गई जो वर्षों से एकलव्य की भूमिका निभाते रहे हैं और रिटायरमेंट से पहले अंतिम तीन प्रस्तुतियां देने वाले हैं। उनकी जगह लेने वाले परितोष के साथ रिश्तों के खुलते रहस्य और पिता-पुत्र के जटिल संबंध कथा का भावनात्मक केंद्र बनते हैं।

अभिषेक मजूमदार ने नाटक के भीतर नाटक जैसे कठिन प्रयोग को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। एकलव्य-अभिमन्यु और पिता-पुत्र की समानांतर कहानियों के माध्यम से कला, नैतिकता, जातिगत असमानता और पारिवारिक तनाव जैसे गंभीर मुद्दों पर सार्थक विमर्श सामने आया। कुमुद मिश्रा, शुभ्राज्योति बराट, गोपाल दत्त और संदीप शिखर के अभिनय ने प्रस्तुति को और मजबूती दी। 

तकनीकी पक्ष में लाइट डिजाइन, सीनोग्राफी, साउंड और कॉस्ट्यूम ने नाटक की संवेदनात्मक गहराई को उभारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंचन के बाद दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष ब्रजेश्वर सिंह ने कलाकारों और दर्शकों का आभार जताया। जानकारी दी कि गुरुवार को डी फॉर ड्रामा का अगला नाटक ''खिचिक'' शाम 6:30 बजे प्रस्तुत किया जाएगा।

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