कानपुर : जैसरमऊ वेटलैंड को मिलेगी नई पहचान, विकास के लिए शासन को भेजा गया प्रस्ताव
कानपुर। कानपुर में बिल्हौर क्षेत्र की गंगा कटरी में स्थित जैसरमऊ वेटलैंड अब जिले की नई पर्यावरणीय पहचान बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड' योजना के अंतर्गत इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और संरक्षण के साथ नियंत्रित विकास की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
करीब छह हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला यह आर्द्रभूमि क्षेत्र गंगा की बाढ़ के जल से भरता है। वर्ष 2022 में अधिसूचना के बाद यहां आधारभूत सुधार कार्य किए गए थे। अब इसे व्यवस्थित रूप से विकसित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह एवं प्रभागीय वन अधिकारी दिव्या ने संयुक्त निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने मंगलवार को निरीक्षण के दौरान ड्रोन मैपिंग कराकर स्पष्ट सीमांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि आसपास की भूमि अतिक्रमण से सुरक्षित रह सके। क्रिटिकल गैप फंड से बर्ड टॉवर एवं वॉच टॉवर बनाए जाएंगे। साथ ही पाथ-वे विकसित कर इसे बर्ड वॉचिंग और नेचर ट्रेल के रूप में विकसित करने की योजना है।
प्रभागीय वन अधिकारी ने बताया कि जैसरमऊ वेटलैंड जैव-विविधता की दृष्टि से समृद्ध है। यहां लिटिल कॉर्मोरेंट, भारतीय मोर, ब्रॉन्ज-विंग्ड जैकाना, यूरेशियन मूरहेन, पर्पल हेरॉन, ग्रेट एगरेट और ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट जैसी पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं। नीलगाय और गोल्डन सियार जैसे स्तनधारी भी यहां देखे गए हैं। तितलियों में पीकॉक पैंसी और प्लेन टाइगर विशेष आकर्षण हैं। अब तक लगभग 150 प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गंगेश्वर आश्रम परिसर में पौधारोपण भी किया। महाशिवरात्रि के अवसर पर गंगेश्वर आश्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन और प्रकृति पर्यटन को जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि वैज्ञानिक संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जैसरमऊ वेटलैंड को मॉडल वेटलैंड के रूप में विकसित किया जाएगा। स्थानीय युवाओं को पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाएगा तथा इको-टूरिज्म आधारित रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे।
