सरकारी स्कूलों की बेटियां बनेंगी ‘सुनीता विलियम्स’, बागपत के गांव तक पहुंची हाईटेक एस्ट्रोनॉमी लैब

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Published By Muskan Dixit
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सभी के लिए मॉडल, 45 प्रयोग, टेलिस्कोप और सॉफ्टवेयर से सीख रहीं ब्रह्मांड के रहस्य

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक अहम पहल की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर अब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियां भी अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां सीख रही हैं। बागपत जनपद के छपरौली ब्लॉक में स्थापित अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी लैब ने ग्रामीण छात्राओं के सपनों को नई उड़ान दी है।

ब्लॉक संसाधन केंद्र परिसर में बनाई गई इस हाईटेक खगोलशास्त्र प्रयोगशाला के माध्यम से छपरौली ब्लॉक की लगभग 100 बालिकाओं को आधुनिक विज्ञान से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है। प्रयोगशाला में 45 प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोगों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिनके जरिए छात्राएं ब्रह्मांड, ग्रहों, तारों और अन्य आकाशीय पिंडों से जुड़े जटिल सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से समझ रही हैं।

योगी सरकार के इस प्रयास से ग्रामीण पृष्ठभूमि की छात्राएं अब केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि टेलिस्कोप संचालन, नाइट-स्काई ऑब्जर्वेशन और डिजिटल सिमुलेशन जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। इससे उनमें जिज्ञासा, आत्मविश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हो रहा है।

बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि इस एस्ट्रोनॉमी लैब को हाईटेक तकनीक से विकसित किया गया है। यहां छात्राओं को आधुनिक उपकरणों के साथ-साथ एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आकाशीय पिंडों की स्थिति, गति और संरचना को डिजिटल माध्यम से समझ पा रही हैं। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि छात्राएं स्वयं टेलिस्कोप के माध्यम से चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर रही हैं। शिक्षकों के अनुसार, जब कोई बालिका अपने हाथों से टेलिस्कोप चलाकर चंद्रमा देखती है तो उसके भीतर आत्मविश्वास के साथ कुछ नया करने की प्रेरणा जन्म लेती है और वह खुद को सुनीता विलियम्स जैसे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों से जोड़कर देखने लगती है। इसके साथ ही बागपत जिले के 25 सरकारी विद्यालयों में एआई-संचालित स्मार्ट क्लास भी शुरू की गई हैं। इन कक्षाओं के माध्यम से बच्चों को इंटरैक्टिव और तकनीक आधारित शिक्षा मिल रही है, जिससे सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है।

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