योगी सरकार की बड़ी पहल, ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत संरक्षण को नई दिशा, पांडुलिपियों दुर्लभ ग्रंथों का होगा डिजिटलीकरण

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: भारतीय ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को सहेजने की दिशा में योगी सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत प्रदेश में उपलब्ध पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों के वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए सभी जिलों में पांडुलिपियों को चिन्हित कर संग्रहित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक जिले में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। उद्देश्य यह है कि सदियों पुरानी ज्ञान-विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाया जा सके।

गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर के अनुसार, मिशन के तहत सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी व सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान और सर्वेक्षण किया जाएगा। 

उन्होंने बताया कि 75 वर्ष से अधिक प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला स्तर पर तैयार सूची संस्कृति विभाग के माध्यम से राजकीय अभिलेखागार को भेजी जाएगी, जहां उच्च गुणवत्ता की स्कैनिंग कर इन्हें डिजिटल स्वरूप दिया जाएगा। डिजिटलीकरण के बाद यह सामग्री ज्ञान भारतम पोर्टल के जरिए आमजन को उपलब्ध होगी।

इस मिशन की खास बात यह है कि पांडुलिपियों का स्वामित्व संबंधित संग्रहकर्ता या संस्था के पास ही रहेगा। सरकार केवल उनके संरक्षण और डिजिटल प्रकाशन का कार्य करेगी। लंबे समय से रखरखाव के अभाव में नष्ट होने की कगार पर खड़े अनेक दुर्लभ ग्रंथों के लिए यह अभियान संजीवनी साबित होगा।

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