PSLV विफलता की जांच करेंगे प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार व पूर्व इसरो चेयरमैन
चेन्नई। केन्द्र सरकार ने देश के रणनीतिक उपग्रह को ले जा रहे पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) रॉकेट की हालिया विफलता की जांच के लिए दो सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन होंगे, जबकि अंतरिक्ष विभाग के पूर्व सचिव और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ सह-अध्यक्ष के रूप में शामिल होंगे।
दिलचस्प बात यह है कि समिति के गठन से कुछ समय पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) का दौरा किया था। उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी 2026 को इसरो का पीएसएलवी-सी62 रॉकेट देश के रणनीतिक हाइपरस्पेक्ट्रल उपग्रह 'अवनेशा' तथा ईओएस-एन1 ले जाते हुए मिशन के दौरान विफल हो गया था।
ईओएस-एन1 के साथ भारतीय और विदेशी संस्थाओं के 15 अन्य छोटे उपग्रह भी नष्ट हो गये। अंतरिक्ष विभाग के सचिव और इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने पहले बताया था कि रॉकेट के पहले दो चरण सामान्य रहे, लेकिन तीसरे चरण के प्रदर्शन के अंतिम हिस्से में गड़बड़ी आई और इसके कारण उड़ान पथ में विचलन हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, इसरो की एक आंतरिक समिति पहले से ही उड़ान डेटा का विश्लेषण कर रही है।
पीएसएलवी चार चरणों वाला प्रक्षेपण यान है, जिसमें पहले और तीसरे चरण में ठोस ईंधन तथा दूसरे और चौथे चरण में द्रव ईंधन का उपयोग होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएसएलवी-सी62 की विफलता मई 2025 में हुए पीएसएलवी-सी61 मिशन की तरह ही प्रतीत होती है, जिसमें तीसरे चरण के दौरान समस्या आई थी और रॉकेट पथ से भटक गया था। यह पीएसएलवी-सी62 विफलता उन लगातार तीन असफलताओं में शामिल है, जो भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े उपग्रह अभियानों को प्रभावित कर चुकी हैं।
जनवरी 2025 में एनवीएस-02 नेविगेशन उपग्रह को जीटीओ कक्षा में स्थापित तो किया गया, लेकिन उसका पायरो वाल्व न खुलने के कारण वह आगे की कक्षा में नहीं जा सका। अभी तक एनवीएस-02 विफलता पर गठित विफलता विश्लेषण समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, जो इसरो की पूर्व परंपरा से अलग है। अंतरिक्ष क्षेत्र के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "एक बार दुर्घटना हो सकती है, दूसरी बार विफलता, लेकिन तीसरी बार? यह गंभीर चिंता का विषय है।"
उन्होंने कहा कि सैकड़ों करोड़ रुपये की लागत वाले अभियानों में विफलता के बावजूद जवाबदेही और जिम्मेदारी तय न होना गंभीर मुद्दा है। नई समिति से उम्मीद की जा रही है कि वह पीएसएलवी-सी62 विफलता के कारणों का गहराई से विश्लेषण कर ठोस निष्कर्ष प्रस्तुत करेगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
