संपादकीय : समझौता और संभावनाएं 

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Published By Pradeep Kumar
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भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, शिक्षा, संस्कृति, नागरिक उड्डयन, तकनीक और आर्थिक सहयोग को व्यापक रूप से आगे बढ़ाने के लिए हुए उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय वार्तालाप और समझौतों ने दोनों देशों के पारंपरिक, सतत और रणनीतिक रिश्तों को नई ऊर्जा दी है। रक्षा सहयोग के तहत राफेल युद्धक विमान सौदा सर्वाधिक महत्व का है, जो भारतीय वायु सेना की टोही, नियंत्रण और संयुक्त ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाएगा। बड़ी बात है कि उन्नत हथियार एकीकरण, स्पेयर पार्ट्स लॉजिस्टिक्स और उत्पादन के तौर पर साझेदारी को और विस्तार देने की भी बात है।

शैक्षिक और मानव संसाधन सहयोग इस समझौते का दूसरा महत्वपूर्ण आयाम है। 3,000 भारतीय छात्रों को वीज़ा-मुक्त ट्रांज़िट की सुविधा मिलेगी, तो वे यूरोप में यात्रा, सीखने और इंटर्नशिप के अवसर लाभ उठा सकेंगे। यह कदम युवा प्रतिभा के वैकल्पिक स्थलों तक पहुंच का द्वार खोलेगा, जिससे वैश्विक कौशल प्रतिस्पर्धा में भारतीय छात्रों की भागीदारी बढ़ेगी, परंतु इसके लिए आवश्यक है कि भारत में इस प्रवाह की गुणवत्ता सुनिश्चित हो। यानी गुणवत्तापूर्ण, रोजगार-उन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। फ्रांस और भारत की जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, एआई और हाई-टेक विनिर्माण तक फैली व्यापक साझेदारी को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ कहा गया है, यह साझा सोच भारत की बहुपक्षीय कूटनीति की पुष्टि करती है। फ्रांस, यूरोपीय संघ का एक मजबूत अंश होने के नाते, भारत को संयुक्त राष्ट्र, जी20 जैसे तमाम वैश्विक मंच पर अपनी आवाज मजबूत करने में मदद कर सकता है। कुछ चुनौतियां और सवाल भी हैं। रक्षा तकनीक स्थानांतरण में भारत अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से रखते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि कलपुर्जों का उत्पादन और उसमें स्थानीय भागीदारी बहुत सीमित न रहे। रक्षा संबंधित अधोसंरचना को स्वदेशी उद्योग के साथ मिलाकर इस साझेदारी को दीर्घकालिक, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से व्यावहार्य बनाए रखने की चुनौती होगी। वर्तमान वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, मुद्रास्फीति और रक्षा बजट का दबाव दोनों देशों के बीच लागत लाभ का सामान्य समीकरण प्रभावित कर सकता है। भविष्य में, शिक्षा-प्लेटफ़ॉर्म के विस्तार के साथ, तकनीकी अनुसंधान और उद्यमशीलता कार्यक्रमों में साझेदारी को बढ़ावा देना होगा। द्विपक्षीय रिश्तों को गहराई देने के लिए भारत और फ्रांस के स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच आदान-प्रदान, सांस्कृतिक और भाषा आधारित प्रशिक्षण, अनुसंधान-अनुकूलित कोलैबोरेशन आवश्यक होगा। आर्थिक मोर्चे पर, दोनों देशों ने निवेश और व्यापार के लिए क्षेत्रीय साझेदारी को बढ़ाने की भी सहमति व्यक्त की है, जिससे औद्योगिक खंडों, नवाचार केंद्रों और हरित प्रौद्योगिकी को विकसित करने में मदद मिलेगी। 

कुल मिलाकर ये समझौते भारत-फ्रांस संबंधों की परिपक्वता का प्रतीक हैं। इसकी खासियत अगर रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक मंचों पर समर्थन, शिक्षा में अवसर है, तो तकनीकी हस्तांतरण पर आगे की चुनौतियां तथा लागत-लाभ की संरचना के दबाव संबंधी सवाल भी। उम्मीद है भविष्य में यह साझेदारी फलदायी होगी और दोनों देश अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों को समझदारी से संतुलित करते हुए सहयोग, संवाद और कार्यान्वयन सुनिश्चित करेंगे।