काशी में पौने तीन सौ करोड़ से एसटीपी निर्माण को मिली मंजूरी, गंगा और वरुणा नदी होंगी प्रदूषण मुक्त
वाराणसी। वाराणसी में गंगा और वरुणा नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लोहता क्षेत्र में 274.31 करोड़ रुपये की लागत से 60 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और इसे नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत स्वीकृति प्रदान की गई है।
गुरुवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने लोहता के ग्राम बेदौली का दौरा कर प्रस्तावित एसटीपी स्थल का निरीक्षण किया। यह संयंत्र दुर्गा नाला के माध्यम से वरुणा नदी में गिर रहे अशोधित सीवेज को रोकने में अहम भूमिका निभाएगा। मंत्री ने परियोजना की तकनीकी पहलुओं और निर्माण संबंधी तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य को तय मानकों और समयसीमा के अनुरूप पूर्ण किया जाए, ताकि प्रदूषण नियंत्रण का लक्ष्य समयबद्ध ढंग से हासिल हो सके।
इस अवसर पर महापौर अशोक कुमार तिवारी, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, जल निगम के अधिशासी अभियंता आशीष सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि एसटीपी निर्माण के साथ ही वरुणा नदी में गिरने वाले 13 नालों को टैप किया जाएगा, जिससे मलजल सीधे नदी में प्रवाहित नहीं होगा।
वरुणा, गंगा की प्रमुख सहायक नदी है, जो आदिकेशव घाट पर गंगा में मिलती है। ऐसे में इस परियोजना से दोनों नदियों के प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की संभावना है। जल निगम की गंगा प्रदूषण इकाई द्वारा करीब डेढ़ वर्ष पूर्व कराए गए सर्वेक्षण के आधार पर वर्ष 2037 तक की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखते हुए कुल 1780.86 करोड़ रुपये की लागत से चार एसटीपी निर्माण का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था।
इनमें भगवानपुर में 308 करोड़ रुपये की लागत से 55 एमएलडी क्षमता का एसटीपी तथा सूजाबाद में 96 करोड़ रुपये की लागत से 7 एमएलडी क्षमता का एसटीपी पहले से निर्माणाधीन है। लोहता में 60 एमएलडी के एसटीपी को मंजूरी मिलने के साथ ही इस योजना को और गति मिली है।
केंद्रीय मंत्री ने भगवानपुर स्थित 55 एमएलडी क्षमता के एसटीपी और अस्सी नाले से गंगा में जा रहे अतिरिक्त सीवेज को रोकने के लिए बनाए गए 50 एमएलडी मुख्य पंपिंग स्टेशन का भी निरीक्षण किया। उन्होंने डायवर्जन कार्यों में तेजी लाने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि वाराणसी शहर का समस्त सीवेज शोधित होकर ही नदियों में पहुंचे और गंगा-वरुणा को स्वच्छ बनाने का अभियान सफल हो सके।
