लाल बारादरी के जीर्णोद्धार के विरोध में हंगामा... NSUI, समाजवादी छात्र सभा और आइसा के सदस्यों ने परिसर के बाहर पढ़ी नमाज

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: करीब 225 वर्षो पुरानी जर्जर लाल बारादरी के जीर्णोंद्धार के विरोध में रविवार को समाजवादी छात्र सभा, एनएसयूआई और आइसा से जुड़े छात्रा ने प्रदर्शन किया। विरोध स्वरूप इन संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने लाल बारादरी के बाहर नमाज पढ़ी और रोजा इफ्तार किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि विवि प्रशासन ऐतिहासिक इमारत को तोड़कर संघ का एजेंडा लागू करना चाहता है।

विश्वविद्यालय परिसर के बीच में स्थित लाल बारादरी बहुत ही जर्जर हो गई है। इमारत में बड़ी-बड़ी झाड़िया और पेड़ उग आए हैं। इसे देखते हुए विवि प्रशासन ने चेतावनी बोर्ड लगाकर भवन में प्रवेश एवं अन्य गतिविधियां प्रतिबंधित कर दी हैं। बारादरी जर्जर होने से अंदर स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ना पहले ही प्रतिबंधित किया है। विवि प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से भवन के चारों तरफ फेंसिंग लगाने के लिए खुदाई शुरू कराई। एहतियातन पुलिस बल भी लगा दिया गया। निर्माण कार्य की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में छात्र पहुंच गए और विरोध करने लगे। उनका कहना था कि लाल बारादरी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्थल है, इसलिए बिना उसकी अनुमति के कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता।

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वन विंडो सिस्टम बनाया जाए

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्र जतीन शुक्ला का कहना है कि यह भवन विश्वविद्यालय परिसर के बीच है। इसकी मरम्मत करनी चाहिए और वन विंडो सिस्टम के तहत छात्रों की हर समस्या का समाधान एक स्थान पर करने वाला भवन विकसित किया जाए। जिससे उसे विश्वविद्यालय चक्कर न काटना पड़े।

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जीर्णोद्धार के लिए 5 करोड़ रुपये स्वीकृत

लाल बारादरी के जीर्णोद्धार के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने गत वर्ष ही पांच करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। यह कार्य प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत प्राप्त अनुदान से होना है। उल्लेखनीय है कि लखनऊ विश्वविद्यालय को पीए उषा के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। नवाबी दौर की यह इमारत ओपन-एयर थिएटर की भव्य पृष्ठभूमि बनेगी, जहां साहित्य महोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने योजना है।

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