हाईकोर्ट : कर चोरी मामले में चीनी महिला को जमानत, निर्णयों में जजों के नाम के उल्लेख पर रोक

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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प्रयागराज, अमृत विचार : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर चोरी के आरोप में गिरफ्तार एक चीनी नागरिक को जमानत देते हुए न्यायिक निर्णयों का हवाला देते समय सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशों के नामों के उल्लेख पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का संदर्भ देते समय न्यायाधीशों के नाम लेना “पूरी तरह अनावश्यक” है और भविष्य में केवल पक्षकारों के नाम, निर्णय की तिथि, केस/उद्धरण विवरण तथा प्रासंगिक अंश ही उद्धृत किए जाएं।

कोर्ट ने जवाबी हलफनामे में सहायक आयुक्त, सीजीएसटी, गौतम बुद्ध नगर और अपर सत्र न्यायाधीश, मेरठ को, जिन्होंने पहली जमानत याचिका को खारिज करने के आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के नामों का उल्लेख किया था, भविष्य में सतर्क रहने का निर्देश दिया। कोर्ट ने नोट किया कि लगभग दो सप्ताह के भीतर यह दूसरी घटना है, जिसमें अधीनस्थ न्यायालय के अधिकारियों द्वारा पूर्व निर्णयों पर भरोसा करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के नामों का उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने इस प्रथा को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उक्त आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्रकरण में अगस्त 2025 से गिरफ्तार चीनी महिला एलिस ली उर्फ ली तेंगली को सशर्त जमानत देते हुए पारित किया। दरअसल महिला पर आरोप है कि वह मेसर्स टेंटेक एलईडी डिस्प्ले प्राइवेट लिमिटेड से संबद्ध थीं, जो कथित रूप से “विजुअल डिस्प्ले यूनिट्स” का गुप्त निर्माण कर रही थी। विभाग के अनुसार कंपनी ने तैयार माल को 28% जीएसटी वाली ‘विजुअल डिस्प्ले यूनिट’ के बजाय 18% जीएसटी वाली ‘कैबिनेट’ के रूप में घोषित कर वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच लगभग 88.80 लाख रुपये की कर चोरी की। हालांकि याची की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें कंपनी में 21 फरवरी 2024 को सुरक्षा कार्य हेतु नियुक्त किया गया था और वे 15,000 रुपये मासिक वेतन पर कार्यरत थीं। यह भी कहा गया कि अपराध मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय हैं तथा इसके लिए अधिकतम सजा पांच वर्ष है। मामले में सह-आरोपी विनय कुमार को पूर्व में जमानत दिए जाने के आधार पर समानता की मांग की गई। वहीं दूसरी ओर सीजीएसटी तथा सरकारी अधिवक्ताओं ने आर्थिक अपराधों को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया। यह भी बताया कि आवेदक का वीजा समाप्त हो चुका था, हालांकि उन्होंने 3 फरवरी 2026 को मुकदमे का सामना कर रहे विदेशी नागरिकों के लिए निर्धारित एक्स-मिसक वीजा विस्तार हेतु आवेदन किया है। 

अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भरोसा करते हुए कहा कि आर्थिक अपराध एक अलग श्रेणी के अपराध हैं और उनके लिए एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि याची आदतन अपराधी थी और उसे पहले भी लखनऊ स्थित एटीएस द्वारा एक अलग मामले में गिरफ्तार किया जा चुका था। अंत में कोर्ट ने माना कि जांच पूर्ण हो चुकी है। कर देयता का आकलन किया जा चुका है और शिकायत दाखिल की जा चुकी है। याची के महिला होने और उनके साथ नाबालिग बच्चे की उपस्थिति, साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका संबंधी ठोस सामग्री के अभाव तथा प्रकरण की समग्र परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें सशर्त जमानत दे दी गई। कोर्ट ने याची को निर्देश दिया कि वह प्रत्येक तारीख पर उपस्थित रहेंगी। उन्हें बिना अनुमति देश छोड़ने से रोका गया है तथा हर दो माह में अपने निवास और आवागमन की जानकारी चीनी दूतावास के माध्यम से कोर्ट को देनी होगी।

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