'शादी से पहले किसी पर भी भरोसा मत करो' : सुप्रीम कोर्ट ने विवाह पूर्व शारीरिक संबंधों पर की सख्त टिप्पणी

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि शादी से पहले लड़का और लड़की ''पूरी तरह से अजनबी'' होते हैं और उन्हें शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने में सतर्कता बरतनी चाहिए। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ शादी का झूठा वादा करके बलात्कार करने के आरोपी एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने महिला से सवाल किया कि वह शारीरिक संबंध बनाने के लिए दुबई तक इतनी दूर क्यों गई। 

पीठ ने कहा, ''यह आपसी सहमति से होता है। हम भले ही पुराने ख्यालों के हों, लेकिन शादी से पहले लड़का और लड़की एक-दूसरे के लिए बिल्कुल अजनबी होते हैं। शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने में उन्हें सतर्कता बरतनी चाहिए।'' न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ''उनके रिश्ते में चाहे जो भी उतार-चढ़ाव हों, हम यह समझने में असमर्थ हैं कि वे शादी से पहले शारीरिक संबंध कैसे बना सकते हैं। हो सकता है हम पुराने ख्यालों के हों, लेकिन आपको बहुत सतर्क रहना चाहिए; शादी से पहले किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए।'' 

महिला के वकील ने कहा कि उनकी मुलाकात 2022 में एक वैवाहिक वेबसाइट पर हुई थी और उसने कथित तौर पर शादी का झूठा वादा करके दिल्ली और बाद में दुबई में कई मौकों पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने महिला से पूछा कि उन्हें दुबई जाने की क्या आवश्यकता थी और उन्होंने टिप्पणी की कि यह आपसी सहमति से बने संबंध का मामला प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा, ''यदि वह इस मामले में इतनी सख्त थी तो उन्हें शादी से पहले नहीं जाना चाहिए था। हम उन्हें मध्यस्थता के लिए भेजेंगे। ये ऐसे मामले नहीं हैं जिनमें आपसी सहमति से संबंध होने पर मुकदमा चलाया जाए और सजा दी जाए।'' न्यायमूर्ति नागरत्ना ने उस व्यक्ति के वकील से कहा कि वह महिला को कुछ मुआवजा देकर मामले को खत्म करे। पीठ ने महिला के वकील से समझौते की संभावना तलाशने को भी कहा और दोनों पक्षों के विचार जानने के लिए मामले की सुनवाई बुधवार को तय की। 

महिला ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि आरोपी के आग्रह पर वह दुबई गई, जहां उसने कथित तौर पर शादी का झूठा वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और उसकी सहमति के बिना अंतरंग वीडियो रिकॉर्ड किए, और धमकी दी कि यदि उसने विरोध किया तो वह इन्हें प्रसारित कर देगा। महिला ने बताया कि बाद में उसे पता चला कि उसने जनवरी 2024 में पंजाब में दूसरी महिला से शादी कर ली थी। 

दिल्ली उच्च न्यायालय और निचली अदालत ने उस व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि आरोपों से प्रथमदृष्टया यह संकेत मिलता है कि विवाह का वादा शुरू से ही झूठा था, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि याचिकाकर्ता पहले से ही विवाहित था और उसने 19 जनवरी, 2024 को दोबारा शादी कर ली थी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उस व्यक्ति ने मामले में जमानत के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। 

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