Iftar Meal : रोजा खोलने के लिए इस सुपरफूड का करते है इस्तेमाल, बाजार में 80 रुपये से लेकर 2200 में उपलब्ध

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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दिल्ली। रमज़ान के महीने में खजूर से रोज़ा इफ्तार (व्रत खोलने) की परंपरा के चलते इस फल की बिक्री बढ़ गई है और बाजार में 80 रुपये से लेकर 2200 रुपये प्रति किलोग्राम तक की अलग-अलग किस्मों की खजूर उपलब्ध हैं। फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद खजूर का ज्यादा इस्तेमाल करते थे और रोज़ा इफ्तार में भी इसी फल का सेवन किया करते थे। 

मुफ्ती के मुताबिक, पैगंबर ने फरमाया है कि अगर खजूर, पानी या दूध से रोज़ेदार को इफ्तार कराया जाए तो इसका बहुत पुण्य मिलता है। उन्होंने कहा कि खजूर पैगंबर मोहम्मद के पसंदीदा फलों में शामिल है और सभी मुस्लिमों की कोशिश रहती कि वे खजूर से रोज़ा खोलें। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ पोषण विशेषज्ञ भी बताते हैं कि खजूर में मौजूद प्राकृतिक शर्करा और आवश्यक पोषक तत्वरोज़े के बाद शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करते हैं। 

नोएडा स्थित मेदांता अस्पताल में मधुमेह विभाग की प्रमुख निधि सहाय ने कहा कि पूरे दिन व्रत रखने के बाद, शरीर को कुछ ऊर्जा तुरंत चाहिए होती है और जब रोज़ेदार खजूर खाते हैं, तो यह शरीर में ज़रूरी ऊर्जा वापस लाने का एक आसान तरीका है। उन्होंने कहा, "खजूर फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन, थोड़ी मात्रा में कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों का एक बहुत अच्छा स्रोत है। इसके अलावा, खजूर में विटामिन बी6 और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो दिल की सेहत को बढ़ावा दे सकते हैं, पाचन में मदद कर सकते हैं, और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फ़ायदेमंद हो सकते हैं।" 

डॉ. सहाय ने कहा कि रोज़ेदार को इफ्तार के समय एक से तीन खजूर खानी चाहिए ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रही। इसी के मद्देनजर रमज़ान के महीने के आगाज़ के साथ बाजार में खजूर की बिक्री तकरीबन 80 फीसदी तक बढ़ गई है। आजादपुर मंडी में खजूर के बड़े व्यापारियों में शामिल अब्दुल गफ्फार ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि रमज़ान के महीने में खजूर की बिक्री 70-80 फीसदी तक बढ़ जाती है और हर तरह की खजूर बिकती है। 

वहीं पूर्वी दिल्ली में खजूर के खुदरा व्यापारी राजा ने भी इस मुकद्दस महीने में इस फल की बिक्री में 80 फीसदी का इजाफा बताते हुए कहा कि बाजार में 100 रुपये से लेकर 2200 रुपये प्रति किलो की खजूर उपलब्ध है और लोग अपनी जेब के हिसाब से खजूर खरीदते हैं। उन्होंने कहा कि आम तौर पर लोग 300 रुपये से लेकर 500 रुपये प्रति किलोग्राम की खजूर खरीदते हैं जिनमें ट्यूनेशियन खजूर, 'बाम', 'मरयम', और 'कलूट' जैसी खजूरें आती हैं। 

राजा ने बताया कि इसके अलावा मदनी की खजूर कलमी भी खासी पसंद की जाती है और यह 500-700 रुपये प्रति किलोग्राम पड़ती है। उन्होंने मंहगी खजूरों के बारे में बताया कि इनमे अंबर, अजवा, बर्नी, मेदजोल जैसे खजूरें होती हैं जिनकी कीमत 1000 रुपये किलोग्राम से लेकर 2200 किलोग्राम तक होती है जो आम तौर पर मदीने की होती है। 

राजा ने कहा कि सबसे महंगी खजूर 'मेदजोल' होती है जो मदीना की दो हजार-2200 रुपये किलो और जॉर्डन की 1600 रुपये किलोग्राम की दर से बिकती है। इसकी खासियत बताते हुए राजा ने कहा कि इस नस्ल की एक खजूर करीब ढाई-तीन इंच लंबी होती है और एक खजूर का वजन ही 100 से 150 ग्राम के बीच होता है और इसकी गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है, इसलिए यह काफी महंगी बिकती है। 

ओखला निवासी अदील कहते हैं कि वह मध्यम स्तर की खजूर लेना ज्यादा पसंद करते हैं, जो 300-400 रुपये किलोग्राम मिलती है। उनके मुताबिक, रमजान में तीन लोगों के उनके परिवार में करीब दो किलोग्राम खजूर का इस्तेमाल हो जाता है। देश में 19 फरवरी से इस महीने की शुरुआत हो चुकी है। इससे अगले 30 दिनों तक मुस्लिम समुदाय के सदस्य सूरज निकलने से पहले से लेकर सूरज डूबने तक कुछ खाते पीते नहीं हैं और ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करते हैं। 

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