लखनऊ : संदीप के लिवर से युवक को मिला नया जीवन

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : मानवता और चिकित्सा समर्पण की मिसाल पेश करते हुए 42 वर्षीय संदीप कुमार के परिजनों ने ब्रेन डेड घोषित होने के बाद अंगदान का साहसिक निर्णय लिया। उनके इस महान कदम से पांच मरीजों को नई जिंदगी मिली। इनमें से एक का लिवर प्रत्यारोपण किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में सफलतापूर्वक किया गया है। मरीज की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।

संदीप कुमार को एसजीपीआई में ब्रेन डेड घोषित किया गया था। परिजनों की सहमति के बाद चिकित्सकों ने रविवार शाम अंगों को सुरक्षित निकाल लिया। हालांकि पीजीआई में लिवर प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त मरीज उपलब्ध नहीं था। ऐसे में केजीएमयू प्रशासन से संपर्क किया गया।

केजीएमयू की कुलपति ने तत्काल पहल करते हुए लिवर रिसीपिएंट की पहचान कराई और प्रत्यारोपण की सभी औपचारिकताएं युद्धस्तर पर पूरी कराईं। रविवार का दिन होने के बावजूद ऑपरेशन थिएटर, आवश्यक दवाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम की त्वरित व्यवस्था की गई।

लिवर प्रत्यारोपण के लिए प्रतीक्षारत 35 वर्षीय युवक को चयनित किया गया। रविवार शाम शुरू हुई सर्जरी सोमवार तड़के करीब 4 से 5 बजे तक चली। गैस्ट्रो सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने बिना पूर्व योजना की इस आपातकालीन सर्जरी में 36 घंटे से अधिक लगातार कार्य कर जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार मरीज को एक्स्ट्यूबेट कर कृत्रिम श्वसन नली हटा दी गई है। सभी महत्वपूर्ण पैरामीटर सामान्य हैं और स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। संदीप कुमार के परिजनों का यह निर्णय न केवल पांच जिंदगियों के लिए नई उम्मीद बना, बल्कि समाज को अंगदान के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता का संदेश भी दे गया।

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