प्रधानमंत्री मोदी को किया गया Speaker of the Knesset से सम्मानित, इजरायल की संसद में बोले पीएम 'Am Yisrael Chai', जानिए इसका मतलब
नई दिल्लीः इजरायल की संसद नेसेट में 25 फरवरी 2026 को दिए ऐतिहासिक संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिब्रू भाषा में जोरदार नारा लगाया "एम यिसराइल चाई" (Am Yisrael Chai), जिसका सीधा अर्थ है "इजरायल के लोग जीवित हैं" या "इजरायल की जनता अमर है"। यह नारा यहूदी समुदाय के लिए सदियों पुरानी चुनौतियों, उत्पीड़न और संकटों के बावजूद अटूट जीवटता, एकता और जीवन की जीत का प्रतीक माना जाता है।
नेसेट में खड़ी तालियों की गड़गड़ाहट
पीएम मोदी ने अपना भाषण "शालोम" और "नमस्ते" से शुरू किया। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों की कड़ी निंदा की, जिसमें निर्दोष नागरिकों की हत्या को किसी भी बहाने जायज नहीं ठहराया जा सकता। मोदी ने कहा, "भारत इजरायल के दर्द को समझता है और उसके साथ पूर्ण एकजुटता से खड़ा है – इस पल में और आगे भी।" भाषण के अंत में "एम यिसराइल चाई" का उद्घोष करने पर नेसेट सदस्य खड़े होकर तालियां बजाने लगे, "मोदी-मोदी" के नारे गूंजे और स्टैंडिंग ओवेशन मिला। इसके बाद पीएम मोदी ने "जय हिंद" कहकर समापन किया।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की बात
प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को वैश्विक खतरा बताते हुए कहा, "कोई भी वजह आम लोगों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकती। आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं है।" उन्होंने भारत के 26/11 मुंबई हमलों का जिक्र किया और कहा कि भारत व इजरायल दोनों ही आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी डबल स्टैंडर्ड के जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हैं। दोनों देशों को मिलकर वैश्विक स्तर पर आतंक के खिलाफ लगातार कार्रवाई करनी होगी, क्योंकि आतंक कहीं भी हो, हर जगह शांति के लिए खतरा है।
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भारत-इजरायल रिश्तों की नई ऊंचाई
यह पहला मौका था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजरायल की संसद को संबोधित किया। नेसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने पीएम मोदी को 'स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल' से सम्मानित किया, यह नेसेट का सर्वोच्च सम्मान है, जो भारत-इजरायल के मजबूत रणनीतिक संबंधों को मान्यता देता है। मोदी ने दोनों देशों की साझेदारी को "अनिश्चित दुनिया में ताकत का स्रोत" बताया और कहा कि यह दोस्ती आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही है।
"एम यिसराइल चाई" नारा 1960 के दशक में सोवियत संघ में यहूदियों के अधिकार आंदोलन से लोकप्रिय हुआ था। 7 अक्टूबर हमलों के बाद यह इजरायल में प्रतिरोध, एकजुटता और आशा का प्रतीक बन गया। पीएम मोदी का यह उद्घोष भारत के इजरायल के प्रति अटूट समर्थन को दुनिया के सामने स्पष्ट संदेश देता है – दोनों राष्ट्र साथ मिलकर चुनौतियों का सामना करेंगे।
