कर्मचारियों का रुका वेतन : परिषद ने कृत्य को बताया अमानवीय, कहा - कंप्यूटर का ज्ञान नहीं, कीपैड मोबाइल से कैसे हो काम
लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखा है, जिसमें कई अधिकारियों और कर्मचारियों को बीते माह का वेतन नहीं मिलने की जानकारी दी गई है। इसके पीछे की वजह मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का ब्योरा न भर पाने की वजह से हुआ है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्यौरा नहीं आया उनका वेतन रोकना न्यायोचित नहीं है।
महामंत्री की तरफ से कहा गया है कि कुछ कर्मचारियों को कम्प्यूटर का ज्ञान नहीं है, जिसके कारण वह अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं भर पा रहे हैं। फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों की हालत और भी दयनीय है, उनके पास आज भी कीपैड फोन है। जिसके कारण वह फार्म भर पाने में असमर्थ रहे। सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिये दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिसका लाभ कार्ड बनने पर उनको मिल सकता है, लेकिन आज भी अधिकांश कर्मचारियों का कैशलेस कार्ड नहीं बन पाया है, इसके पीछे की वजह भी साधन और जानकारी का आभाव है।
ऐसे में वेतन रोकने जैसा कृत्य मानवीय दृष्टिकोण से कदापि उचित नही है । आज के परिवेश में यदि कर्मचारी का वेतन कुछ दिन विलम्ब होता है तो उसको और उसके परिवार को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यही हुआ भी है है, वेतन रुकने से कर्मचारी व उसका परिवार भुखमरी की कगार पर है। बोर्ड सहित समस्त कक्षाओ की परीक्षाएं चल रही है इनके बच्चों को उसमें भी समस्यायें आ रही है साथ ही होली जैसे पर्व पर वेतन न मिलना एक तरह से सरकार के द्वारा शोषण की श्रेणी में आता है। कई जनपदों से पदाधिकारियों द्वारा यह भी संज्ञान में लाया गया है कि वर्तमान में कई दिनों से पोर्टल भी बन्द चल रहा है। जिसके कारण जो कर्मचारी अपना विवरण भरने की कोशिश कर रहे हैं, उनका भी कार्य नहीं हो रहा है।
अतुल मिश्रा ने कहा कि सरकार को उचित व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे कर्मचारियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जा सके। साथ ही कर्मचारियों का वेतन जल्द से जल्द दिया जाये। जिससे सरकार के इस निर्णय से कर्मचारियों के परिवार को सामाजिक समस्या का सामना न करना पड़े।
