लखनऊ : परिवहन निगम में वे-बिल घोटाले का खुलासा, पांच सदस्यीय टीम जांच में जुटी
लखनऊ, अमृत विचार : परिवहन निगम में वे-बिल के जरिए कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार आलमबाग डिपो में कार्यरत बस परिचालक अमित ठाकुर ने वर्ष 2019 में जारी वे-बिल का उपयोग जनवरी 2026 में किया। सात वर्ष पुराने वे-बिल को रजिस्टर और कंप्यूटर में दर्ज किए बिना इस्तेमाल करने का आरोप है। इस गड़बड़ी से परिवहन निगम को करीब 40 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक वे-बिल जब किसी परिचालक को आवंटित किया जाता है तो उसे रजिस्टर में चढ़ाया जाता है और उसकी कंप्यूटराइज्ड मॉनिटरिंग भी होती है। इसके बावजूद इतने पुराने वे-बिल का उपयोग हो जाना विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। बताया जा रहा है कि परिचालक ने वे-बिल को बिना आधिकारिक प्रविष्टि के गुपचुप तरीके से प्रयोग किया।
यात्रियों की संख्या कम दिखाकर राजस्व में हेराफेरी का आरोप
नियमों के तहत बस परिचालकों को वे-बिल में यात्रियों की संख्या, यात्रा का प्रारंभ और गंतव्य, प्रत्येक टिकट की राशि और कुल किराया दर्ज करना अनिवार्य होता है। इसी आधार पर निगम के खाते में राजस्व जमा किया जाता है। आरोप है कि कुछ मामलों में वास्तविक 60 यात्रियों के बजाय 40-45 यात्रियों का ही विवरण दर्ज कर कम राजस्व दिखाया गया और शेष राशि कथित रूप से निजी तौर पर रख ली गई।
आरएम बोले निष्पक्ष जांच होगी
क्षेत्रीय प्रबंधक अमरनाथ सहाय ने कहा कि वे-बिल का रजिस्टर और कंप्यूटर में दर्ज होना अनिवार्य है। इसके बावजूद दुरुपयोग हुआ है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने बताया कि जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है और निष्पक्ष जांच के बाद जल्द ही पूरे प्रकरण का खुलासा किया जाएगा।
