ताले का आविष्कार

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Published By Anjali Singh
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ताला मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन सुरक्षा साधनों में से एक है। माना जाता है कि ताले का प्रारंभ लगभग चार हजार वर्ष पूर्व हुआ। सबसे पुराने ताले प्राचीन मिस्र तथा मेसोपोटामिया (वर्तमान इराक क्षेत्र) में पाए गए हैं। ये ताले प्रायः लकड़ी के बने होते थे और कुंडी-खूंटी की विशेष व्यवस्था पर आधारित थे। जब चाबी भीतर डाली जाती थी, तो लकड़ी की खूंटियां ऊपर उठती थीं और द्वार खुल जाता था।

इसके पश्चात् प्राचीन रोम में धातु के ताले और चाबियां बनने लगीं। रोमन शिल्पकारों ने लोहे और पीतल से छोटे, परंतु अधिक सुदृढ़ ताले बनाए। इससे सुरक्षा की व्यवस्था अधिक प्रभावी हुई। मध्यकाल में यूरोप में ताले केवल सुरक्षा का साधन ही नहीं रहे, बल्कि उन पर सुंदर नक्काशी और कलात्मक आकृतियां भी बनाई जाने लगीं।

आधुनिक ताले के विकास में उन्नीसवीं शताब्दी का विशेष योगदान रहा। सन् 1861 में अमेरिकी आविष्कारक लिनस येल जूनियर ने आधुनिक पिन-टंबलर सिलिंडर लॉक का पेटेंट कराया। यह प्रणाली आज भी व्यापक रूप से प्रचलित है और “येक लॉक” के नाम से जानी जाती है।

इसने ताले को अधिक सुरक्षित, छोटा और उपयोग में सरल बना दिया। इस प्रकार ताले का आविष्कार किसी एक व्यक्ति की देन नहीं है, बल्कि यह हजारों वर्षों में विकसित हुई तकनीकों का परिणाम है। प्राचीन लकड़ी के साधारण ताले से लेकर आज के अंक-संकेत तथा अंगुली-छाप से खुलने वाले आधुनिक तालों तक, ताले ने मानव जीवन में सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वैज्ञानिक के बारे में

लिनस येल जूनियर का जन्म 4 जून 1821 को संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य में हुआ था। उनके पिता लिनस येल सीनियर भी ताला निर्माण के क्षेत्र में कुशल कारीगर और आविष्कारक थे, जिससे उन्हें बचपन से ही इस कार्य का अनुभव मिला। येल जूनियर ने प्रारंभ में बैंक तिजोरियों की सुरक्षा प्रणाली पर काम किया, लेकिन बाद में छोटे और सुरक्षित सिलिंडर ताले के विकास में जुट गए। वे अत्यंत परिश्रमी और नवाचारप्रिय व्यक्तित्व के धनी थे। 1868 में उनका निधन हो गया, किंतु उनका आविष्कार आज भी विश्वभर में प्रचलित है।