वर्ड स्मिथ : ऐसे बना बॉयकाट शब्द
आज ‘बॉयकाट’ शब्द विरोध, असहमति और सामाजिक बहिष्कार का पर्याय बन चुका है। इस शब्द की उत्पत्ति 19 वीं सदी के आयरलैंड से जुड़ी है। उस समय आयरलैंड ब्रिटिश शासन के अधीन था और वहां किसानों की हालत बेहद दयनीय थी। बड़े जमींदारों की जमीन पर खेती करने वाले किसानों से अत्यधिक किराया वसूला जाता था।
ऐसे ही एक जमींदार की जमीन का प्रबंधन ब्रिटिश अधिकारी चार्ल्स बॉयकाट (Charles Boycott) के हाथ में था। वे कठोर और असंवेदनशील माने जाते थे। साल 1880 में जब किसानों ने फसल खराब होने के कारण किराया कम करने की मांग की, तो चार्ल्स बॉयकाट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने कई किसानों को जमीन से बेदखल करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी।
इससे किसानों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया, लेकिन उन्होंने हिंसा का रास्ता नहीं चुना। इसके बजाय आयरिश राष्ट्रवादी संगठन लैंड लीग के नेतृत्व में एक नया, शांतिपूर्ण तरीका अपनाया गया- सामाजिक बहिष्कार। इस बहिष्कार के तहत कोई भी व्यक्ति चार्ल्स बॉयकाट से बात नहीं करता था। मजदूर उनके खेतों में काम करने से मना कर देते थे, दुकानदार उन्हें सामान नहीं बेचते थे, डाकिया तक उनकी चिट्ठियां नहीं पहुंचाता था। वे समाज में पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए।
यह अहिंसक विरोध इतना प्रभावी सिद्ध हुआ कि अंततः उन्हें उस क्षेत्र को छोड़ना पड़ा। इस अनोखे विरोध की खबरें ब्रिटिश अखबारों में प्रमुखता से छपीं। पत्रकारों ने इस सामाजिक बहिष्कार को उसी व्यक्ति के नाम पर “Boycott” कहना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह शब्द अंग्रेजी भाषा में स्थापित हो गया और बाद में दुनिया की अनेक भाषाओं में फैल गया।
आज ‘बॉयकाट’ का अर्थ किसी व्यक्ति, संस्था, देश या उत्पाद का संगठित और शांतिपूर्ण तरीके से बहिष्कार करना है। इस प्रकार ‘बॉयकाट’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि इतिहास की वह सीख है, जो बताती है कि संगठित सामाजिक चेतना बिना हिंसा के भी बड़े बदलाव ला सकती है।
