जनवरी 2026 में उड़ानों का नया रिकॉर्ड: 1.52 करोड़ से ज्यादा यात्रियों ने किया हवाई सफर, इंडिगो ने वापस कब्जाया 63.6%  बाजार का हिस्सा

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Published By Muskan Dixit
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नई दिल्लीः हवाई यात्रियों की संख्या जनवरी में 4.36 प्रतिशत बढ़कर नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गयी। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी में घरेलू विमान सेवा कंपनियों की उड़ानों में सफर करने वालों की संख्या एक करोड़ 52 लाख 49 हजार रही। यह जनवरी 2025 के एक करोड़ 46 लाख 11 हजार से 4.36 प्रतिशत अधिक है और अपने-आप में नया रिकॉर्ड है। इससे पहले, नवंबर 2025 में हवाई यात्रियों की संख्या एक करोड़ 52 लाख 38 हजार रही थी। 

हालांकि दिसंबर में इंडिगो के परिचालन में बड़े व्यवधान के कारण यह आंकड़ा घटकर 1.43 करोड़ रहा गया था। खास बात यह रही कि दिसंबर 2025 में बड़ी गिरावट के बाद जनवरी में इंडिगो ने यात्रियों की संख्या के मामले में अपनी पुरानी बाजार हिस्सेदारी फिर से हासिल कर ली। पिछले साल दिसंबर के पहले सप्ताह के दौरान हजारों की संख्या में उड़ानें रद्द करने के बाद उसकी बाजार हिस्सेदारी नवंबर के 63.6 प्रतिशत से घटकर 59.6 प्रतिशत रह गयी थी। जनवरी में एक बार फिर यह 63.6 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। इसका मतलब यह है कि यात्री एक बार फिर इंडिगो की तरफ वापस गये हैं। 

दूसरी तरफ, दिसंबर में अस्थायी रूप से बढ़ने (29.6 प्रतिशत) के बाद एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी घटकर जनवरी में 26.5 प्रतिशत रह गयी। अकासा एयर (4.8 प्रतिशत) और स्पाइसजेट (3.9 प्रतिशत) क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। इंडिगो और एयर इंडिया की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी लगातार 90 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। अधिक से अधिक भरी सीटों के साथ उड़ान भरने के मामले में अकासा एयर ने एक बार फिर बाजी मारी। जनवरी में वह अकेली एयरलाइंस रही जिसका भरी सीटों का अनुपात (पीएलएफ) 90 प्रतिशत से अधिक रहा। अकासा का पीएलएफ 93.2 प्रतिशत रहा। 

इंडिगो 87.7 प्रतिशत के साथ दूसरे और एयर इंडिया समूह 86.5 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा। स्पाइसजेट का पीएलएफ 85.9 प्रतिशत और क्षेत्रीय विमान सेवा कंपनी फ्लाई91 का 80.3 प्रतिशत रहा। विमान सेवा कंपनियों को जनवरी में यात्रियों से कुल 9,158 शिकायतें मिलीं जिनमें 9,155 का समाधान कर दिया गया है। शिकायतों में 57.3 प्रतिशत बैगेज से संबंधित थीं जबकि 21.7 प्रतिशत उड़ानों की समस्याओं से संबंधित थीं। रिफंड को लेकर भी 10.2 प्रतिशत शिकायतें प्राप्त हुईं। 

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