फर्स्ट राइड: उत्साह, हिम्मत और आत्मनिर्भरता की यात्रा

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Published By Anjali Singh
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मैंने जब गाड़ी चलाना सीखने के बारे में सोचा, तब मैं बहुत ज्यादा उत्साहित थी। सच कहूं तो मुझे पहले कभी अंदाजा नहीं था कि मैं भी गाड़ी चला पाऊंगी, लेकिन मन के भीतर एक दृढ़ इच्छा थी कि मुझे सीखना है। मुझे लगता था कि अगर घर में कोई भी व्यक्ति वाहन चला सकता है, तो मुझे भी यह कौशल आना चाहिए। यही सोच मेरे हौंसले की सबसे बड़ी ताकत बनी।

इस पूरे सफर में मेरे पति और मेरी छोटी-सी बेटी ने मेरा बहुत साथ दिया। आज भी मुझे वह दिन याद है, जब पहली बार ड्राइविंग स्कूल के इंस्ट्रक्टर हमें सिखाने आते थे। उनका मॉर्निंग शेड्यूल होता था, इसलिए हमें सुबह लगभग साढ़े पांच या छह बजे तक पहुंच जाना पड़ता था। मेरे पति हर दिन मेरा हौसला बढ़ाते थे और मेरी छोटी बेटी भी जाग जाती थी और कहती “मम्मी आपको सीखने जाना है।” उसका वह मासूम उत्साह मेरे लिए प्रेरणा बन जाता था।

पहली बार जब मैंने सड़क पर गाड़ी चलाई, तो दिल में थोड़ा डर था। वजह भी साफ थी कि सड़क पर गाड़ी चलाना सिर्फ खुद को संभालना नहीं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी होता है। शुरुआत में हर मोड़ और हर ब्रेक पर घबराहट महसूस होती थी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और अभ्यास बढ़ता गया, मेरे अंदर आत्मविश्वास भी बढ़ने लगा। धीरे-धीरे डर की जगह विश्वास ने ले ली और ड्राइविंग मुझे मुश्किल नहीं, बल्कि आनंददायक लगने लगी।

आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं, तो महसूस करती हूं कि मेरे परिवार के सहयोग और मेरे खुद के हौसले की वजह से ही मैं आज इतनी आत्मविश्वास से गाड़ी चला पाती हूं। यह अनुभव मेरे लिए सिर्फ एक नई स्किल सीखने का नहीं था, बल्कि खुद पर भरोसा करना और अपने डर को हराना सीखने का भी था। सच में, मेरा ड्राइविंग का अनुभव बहुत अच्छा रहा, क्योंकि इसमें मेहनत, साहस और अपनों का साथ तीनों शामिल थे।

गाड़ी सीखने के शुरुआती दिनों में कई बार ऐसा हुआ कि चलते-चलते गाड़ी बंद हो जाती, क्लच ठीक से संभलता नहीं था और गियर बदलते समय समझ ही नहीं आता था कि क्या करूं। बीच सड़क पर ट्रैफिक चल रहा होता और मेरी गाड़ी रुकी खड़ी रहती, तो एक पल के लिए लगता था कि शायद मुझसे नहीं हो पाएगा, लेकिन अगले ही क्षण मैंने खुद को हौसला दिया नहीं, मुझे यह जरूर सीखना है। यही आत्मविश्वास धीरे-धीरे मेरे डर को ताकत में बदलता गया और आखिरकार मैं सफल हो गई।-प्रगति श्रीवास्तव, वाइस प्रिंसिपल, सरयू इंटरनेशनल स्कूल,अयोध्या।