कुंडली में मंगल दोष को ऐसे करें दूर

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Published By Anjali Singh
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हमारी कुंडली में मंगल अनुकूल न हो, तो हमें मंगल के कारण कष्ट हो सकते हैं। मंगल शनि, राहु, केतु या हर्षल की दृष्टि में हो, वक्री हो या कुंडली में दूसरे, चौथे, छठे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो मंगल अच्छे फल देने में असमर्थ होता है और वैवाहिक जीवन में असंतोष, सुख की कमी, अच्छी आय न होना, जीवन में सफलता न मिलना जैसे बुरे परिणाम देखने को मिलते हैं। इसलिए, इन कष्टों से मुक्ति पाने के लिए मार्कण्डेय पुराण में वर्णित मंगल कवचम् का प्रतिदिन तीन बार पाठ करना चाहिए। 

मंगल अशुभ होने के लक्षण: ज्योतिष के अनुसार, मंगल ग्रह के खराब होने के लक्षणों में अत्यधिक गुस्सा, चिड़चिड़ापन, आत्मविश्वास की कमी, शारीरिक कमजोरी, बार-बार चोट लगना, रक्त संबंधी समस्याएं (जैसे बीपी), वैवाहिक जीवन में कलह, कानूनी विवाद और करियर में संघर्ष शामिल हैं, संतान न होना, होकर मर जाना, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, जिससे व्यक्ति आलस्य महसूस कर सकता है और महत्वपूर्ण निर्णय लेने में हिचकिचाता है। यह लक्षण व्यक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। 

धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय : मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, गुड़-चना चढ़ाएं और ‘ॐ हं हनुमते नमः’ या ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः’ मंत्र का जाप करें। 21 मंगलवार का व्रत रखें और नमक का सेवन न करें। साथ ही लाल मसूर दाल, गुड़, भुने चने, तांबा और लाल अनाज ज़रूरतमंदों को दान करें।

मंगल मंत्र पूजा: मंगल देव के कई मंत्र हैं, जिनमें मुख्य हैं बीज मंत्र ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः’, जो मंगल दोष निवारण और शक्ति के लिए है।

मुख्य मंगल देव मंत्र: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः , यह मंत्र साहस, शक्ति और ऊर्जा प्रदान करता है और मंगल दोष को शांत करने के लिए बहुत प्रभावशाली माना जाता है।

जाप करने का तरीका: मंगलवार के दिन, स्नान के बाद लाल वस्त्र पहनकर इन मंत्रों का जाप करें, लाल मूंगा या लाल सूत की माला का प्रयोग कर सकते हैं, बीज मंत्र का जाप 108 बार करने से विशेष लाभ होता है।-अनिल सुधांशु