खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर में सख्ती: विरोध में प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में जवान तैनात

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Published By Anjali Singh
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श्रीनगर। कश्मीर में सोमवार को अधिकारियों ने उन इलाकों में लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिए जहां ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। ईरान पर इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले के दौरान शनिवार को तेहरान में एक हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरानी सरकारी मीडिया ने इसकी पुष्टि की है। अधिकारियों ने बताया कि लाल चौक स्थित घंटाघर को चारों ओर अवरोधक लगाकर बंद कर दिया गया है। 

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को जुटने से रोकने के लिए पूरे शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को तैनात किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में लगभग 15 लाख शिया आबादी है। खामेनेई के मौत के खिलाफ लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखे गए। 

प्रदर्शनकारियों को छाती पीटकर मातम मनाते और अमेरिका व इजराइल विरोधी नारे लगाते देखा गया। अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर ये पाबंदियां लगाई गई हैं। उन्होंने बताया कि महत्वपूर्ण चौराहों पर कटीले तार और अवरोधक लगाए गए हैं। घाटी के अन्य जिलों के शिया बहुल इलाकों में भी इसी तरह की पाबंदियां लागू की गई हैं। ये पाबंदियां मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक द्वारा एक दिवसीय बंद के आह्वान की पृष्ठभूमि में आई हैं। 

मीरवाइज ने कहा, "हम लोगों से इसे एकता, गरिमा और पूर्ण शांति के साथ मनाने का आग्रह करते हैं।" एमएमयू के बंद के आह्वान को विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सहित कई राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है। मुफ्ती ने कहा, "ईरान के सर्वोच्च नेता की शहादत पर मीरवाइज उमर फारूक के बंद के आह्वान को हम अपना पूर्ण समर्थन देते हैं। 

यह शोक का दिन है जो दुनिया को याद दिलाता है कि कहीं भी होने वाला अन्याय पूरी मुस्लिम उम्माह और सच्चाई के साथ खड़े सभी लोगों को आहत करता है।" अधिकारियों ने छात्रों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर निजी स्कूलों सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों को भी दो दिन के लिए बंद कर दिया है। 

कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट की गति धीमी 

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में हुए प्रदर्शनों के मद्देनजर सोमवार को कश्मीर भर में मोबाइल इंटरनेट की गति धीमी कर दी गई। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर यह कदम उठाया गया है। शनिवार को तेहरान में इजराइल और अमेरिका द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गयी थी। ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार को इसकी पुष्टि की जिसके बाद भारत समेत दुनियाभर में प्रदर्शन हुए। एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में लगभग 15 लाख शिया रहते हैं। 

उन्होंने बताया कि लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों को अमेरिका विरोधी और इजराइल विरोधी नारे लगाते हुए और मातम मनाने के तौर पर अपनी छाती पीटते हुए देखा गया। अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर घाटी में सभी मोबाइल नेटवर्क की हाई-स्पीड इंटरनेट की गति धीमी कर दी गई है। 

इस बीच, पुलिस ने एक परामर्श जारी कर सभी मीडिया संस्थानों और समाचार मंचों से अपनी रिपोर्टिंग में उच्चतम स्तर की जिम्मेदारी और पेशेवर रवैया बरतने का आग्रह किया है। परामर्श में कहा गया है, ''कृपया अपुष्ट जानकारी, अटकलों या अफवाहों को प्रकाशित करने से बचें; सुनिश्चित करें कि सभी रिपोर्टों को प्रसारित करने से पहले विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि की गई हो; और सनसनीखेज सुर्खियों से बचें जो अनावश्यक दहशत पैदा कर सकती हैं।'' पुलिस ने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखने और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार तथा तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग आवश्यक है।

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