Bareilly: 2012 से पहले के ईंट भट्ठे होंगे वैध, आबादी से आठ सौ मीटर दूर भी लगा सकेंगे
बरेली, अमृत विचार। ईंट भट्ठा कारोबार को संजीवनी देने के लिए और लोगों को ईंटें नजदीक उपलब्ध करने के लिए उत्तर प्रदेश ईंट भट्ठा नियमावली में किए गए कुछ बदलावों का फायदा बरेली के कारोबारियों को भी मिलेगा। वर्ष 2012 से संचालित ऐसे ईंट भट्ठे जिनके पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी नहीं हैं, उनके लिए खुशखबरी है। उन्हें सरकार वैध करने जा रही है। जिन संचालकों के पास 2012 से पहले जिला पंचायत, नगर निगम, खनन विभाग, वन विभाग से किसी तरह की रसीद कटवाई है तो वह रसीद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ईंट भट्ठे को वैध करने का रास्ता खोलेगी।
दरअसल, जिले में कुल 376 ईंट भट्ठे कागजों में हैं, जिनमें से 230 संचालित और 130 ईंट भट्ठे बंद बताए जा रहे हैं। बंद भट्ठों के पीछे विनियमन शुल्क, आवेदन शुल्क और पलोथन शुल्क का भुगतान जमा न होने सहित कई कारण हैं। इसमें तमाम भट्ठे आबादी के नजदीक आने की वजह से बंद हो गए। कुछ भट्ठे अन्य कारणों से बंद हुए। जिन भट्ठा संचालकों के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी नहीं हैं, उसमें कुछ सख्ती की वजह से बंद हैं लेकिन तमाम ऐसे भी हैं, जो बिना एनओसी के संचालित हैं। फरीदपुर तहसील क्षेत्र में तमाम ईंट भट्ठे बिना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी के संचालित हैं। भोजीपुरा क्षेत्र में भी कई इसी तरह से संचालित हैं।
हालांकि 2012 से जो ईंट भट्ठे संचालित हैं और उनके पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी नहीं है तो उनके लिए राज्य सरकार ने वैध कराने का मौका दिया है। इसके साथ जो ईंट भट्ठे आबादी से एक किमी की कम दूरी पर होने की वजह से बंद हो गए, ऐसे संचालकों के लिए भी फिर से ईंट भट्ठा शुरू करने का मौका मिल सकेगा। नियमावली में हुए कुछ बदलाव से अब आबादी से महज आठ सौ मीटर की दूरी पर ईंट भट्ठे का कारोबार कर सकेंगे।
इस संबंध में वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार का कहना है कि वर्ष 2012 के पहले के ईंट भट्ठों को वैध करने के पीछे ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देना और नागरिकों को नजदीक में ही ईंटें उपलब्ध कराने का प्रमुख उद्देश्य है। भट्ठा कारोबार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार यह नियम लेकर आई है। प्रदेश भर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
