वर्ल्ड हियरिंग डे विशेष: "दुनिया में नौ करोड़ बच्चों को कम सुनाई पड़ता है -कान की बीमारी कैसे बच्चे के सीखने और मानसिक विकास को करती है प्रभावित”

Amrit Vichar Network
Published By Pradeep Kumar
On

बरेली, अमृत विचार। हर साल 3 मार्च को दुनिया भर में 'वर्ल्ड हियरिंग डे' मनाया जाता है। इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की थीम 'फ्रॉम कम्युनिटीज टू क्लासरूम्स' के तहत बच्चों की हियरिंग स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसलिए भी क्योंकि जिन बच्चों को कम सुनाई पड़ता है-वे जिंदगी की रेस में अक्सर पिछड़ने लगते हैं. एक ऐसे समय में जब मेडिकल साइंस में असाध्य रोगों तक के इलाज सफल हो रहे हैं. तब कान की बीमारी भी आसानी से ठीक की जा सकती है. बशर्ते, माता-पिता वक्त पर डॉक्टर को दिखायें. कान या सुनने की क्षमता को बरकरार रखने और इस बीमारी से कैसे बच्चों को बचाए रखें. इस विषय पर रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ईएनटी (ENT) विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और अनुभवी ईएनटी सर्जन डॉ. आदित्य सिंघल ने बच्चों में सुनने की क्षमता और कानों के स्वास्थ्य पर एक पॉडकास्ट में विस्तार से चर्चा की. 

बच्चों पर फोकस क्यों जरूरी है?
डॉ. आदित्य सिंघल ने बताया कि दुनिया भर में लगभग 9 करोड़ बच्चे सुनने की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा, "बच्चों में सुनने की समस्या अक्सर धीरे-धीरे और चुपचाप बढ़ती है। माता-पिता इसे अक्सर बच्चे की शरारत या लापरवाही समझ लेते हैं, जबकि असल में बच्चा सुन नहीं पा रहा होता।"

डॉ. सिंघल के अनुसार, यदि समय रहते जांच न हो, तो इसका असर बच्चे के भाषा विकास, बोलने की क्षमता, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर गंभीर रूप से पड़ता है। राहत की बात यह है कि लगभग 60 प्रतिशत बच्चों में यह समस्या रोकी जा सकती है (Preventable), यदि मवाद आना या कान में पानी जमा होने जैसी बीमारियों का सही समय पर इलाज हो जाए।

मोबाइल और इयरपॉड्स का खतरा
आजकल के डिजिटल युग में मोबाइल और इयरपॉड्स के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए डॉ. सिंघल ने '60-60 नियम' का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हेडफोन का इस्तेमाल करते समय वॉल्यूम अधिकतम 60 प्रतिशत रखें और एक बार में 60 मिनट से ज़्यादा इसका प्रयोग न करें। तेज़ आवाज़ सीधे तौर पर कान की अंदरूनी नसों (हेयर सेल्स) को स्थायी नुकसान पहुँचा सकती है।

शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका
शिक्षकों को इस मुहिम का अहम हिस्सा बताते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि क्लासरूम में अगर कोई बच्चा बार-बार बात दोहराने को कहे या पढ़ाई में अचानक पिछड़ने लगे, तो शिक्षक को तुरंत अलर्ट हो जाना चाहिए। वहीं, अभिभावकों को सलाह दी गई कि यदि बच्चा आवाज़ देने पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।

रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध सुविधाएं
डॉ. आदित्य सिंघल ने जानकारी दी कि रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हियरिंग केयर की विस्तृत सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहाँ नवजात शिशुओं के लिए:

OAE और BERA टेस्ट: (पैदा होने के 1 महीने के भीतर स्क्रीनिंग ज़रूरी)।

कॉक्लियर इम्प्लांट: गंभीर समस्याओं के लिए आधुनिक सर्जरी।

सरकारी सहयोग: एडिप (ADIP) योजना के तहत आर्थिक सहायता की प्रक्रिया।

विशेषज्ञ का संदेश: "एक्ट नाउ सो दैट नो चाइल्ड इज लेफ्ट बिहाइंड (अभी कदम उठाएं ताकि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे)। जल्द पहचान ही बेहतर भविष्य की गारंटी है।"

पॉडकास्ट का संचालन डॉ. इरम शैफाली द्वारा किया गया, जिन्होंने अंत में संदेश दिया कि सुनना ही सीखने की पहली सीढ़ी है और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर बच्चा सुन सके और आगे बढ़ सके।

संबंधित समाचार